Delhi: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा को लेकर भारत ने चिंता जताई है और इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाए जाने के मामले पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस तरह के हमलों को राजनीतिक हिंसा या मीडिया रिपोर्ट्स बताकर दरकिनार नहीं किया जा सकता।
अल्पसंख्यकों पर हिंसा की आलोचना
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हो रही घटनाओं की आलोचना की और कहा कि हम अवगत हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। वहां पर हिंदुओं, ईसाई, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ जिस तरह की हिंसा सामने आ रही है, वह गंभीर चिंता का विषय है। वहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान की स्वदेश वापसी पर भारत की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।
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विदेश मंत्रालय (Delhi) ने रहमान की वापसी पर कहा है कि भारत बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का समर्थन करता है; इस घटनाक्रम को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इस समय बांग्लादेश राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। फरवरी में होने वाले चुनाव से पहले हालात तनावपूर्ण हैं। अवामी लीग, जिसे भारत के करीब माना जाता है, चुनाव नहीं लड़ रही। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के दौर में भारत से दूरी और पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ने के संकेत मिले हैं। कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी फिर से सक्रिय हुआ है, जिसे भारत पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ा मानता है। ऐसे में भारत को लगता है कि बीएनपी अपेक्षाकृत उदार और लोकतांत्रिक विकल्प हो सकती है, भले ही अतीत में भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास रही हो।
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