US-Iran Conflict: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है.ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया है,जबकि अमेरिका ने इन हमलों को नाकाम बताते हुए ईरान के रणनीतिक केश्म आइलैंड और एक ऑयल टैंकर को निशाना बनाया है.दूसरी ओर, दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच भी संघर्ष तेज हो गया है.बढ़ते सैन्य टकराव के बीच क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका गहराने लगी है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी खतरा मंडरा रहा है.
कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय,सैन्य एयरबेस और हेलीकॉप्टरों को मिसाइलों एवं ड्रोन से निशाना बनाया.हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक,ईरान द्वारा दागी गई सभी बैलिस्टिक मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया गया और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.
अमेरिका का केश्म आइलैंड और ऑयल टैंकर पर हमला
तनाव के बीच अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के केश्म आइलैंड स्थित एक कम्युनिकेशन टावर पर हमला किया.अमेरिकी सेना ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया.इसके अलावा होर्मुज के निकट एक ऑयल टैंकर को भी निशाना बनाया गया,जिसका वीडियो CENTCOM ने जारी किया है.टैंकर से आग की लपटें उठती दिखाई दीं.
दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के 13 हमलों का दावा
हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना के खिलाफ 13 हमले किए.संगठन के अनुसार, रॉकेट, गाइडेड मिसाइल, आर्टिलरी और ड्रोन के जरिए सैन्य वाहनों, कमांड पोस्ट और सैनिक जमावड़ों को निशाना बनाया गया.
अमेरिका के निशाने पर क्यों है केश्म आइलैंड?
करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला केश्म आइलैंड खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा द्वीप है.होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर स्थित यह द्वीप ईरान के लिए रणनीतिक सैन्य केंद्र बन चुका है.रिपोर्ट्स के अनुसार यहां भूमिगत सुरंगों, मिसाइल सिस्टम और तेज हमला करने वाली नौकाओं का नेटवर्क मौजूद है.अमेरिका का मानना है कि इस द्वीप के जरिए ईरान होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित कर सकता है,जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है.
अमेरिकी सांसद ने इजराइल को मदद पर उठाए सवाल
अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने इजराइल को दी जाने वाली अमेरिकी आर्थिक सहायता की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका एक महीने के लिए इजराइल की मदद रोक दे तो क्षेत्र में शांति स्थापित हो सकती है और तेल की कीमतों में भी कमी आ सकती है.मैसी ने ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच तनाव की खबरों को भी महज चर्चाएं बताया.
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