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‘आतंकी गतिविधियों, साइबर क्राइम, पेपर लीक का अड्डा बना Telegram ‘, सरकार की दिल्ली HC में दलील

Telegram News

Telegram News: भारत में टेलीग्राम को करीब हफ्ते भर के बैन कर दिया है. सरकार के इस फैसले को टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में चैलेंज किया है. जिसको लेकर आज गुरुवार को टेलीग्राम की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई भी हुई. इस दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट में दावा किया है कि टेलीग्राम आतंकवादी गतिविधियों, साइबर अपराध, पेपर लीक, ड्रग्स तस्करी और वित्तीय घोटालों के लिए सबसे आसान प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है.

टेलीग्राम पर सरकार का बड़ा आरोप
भारत सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में टेलीग्राम को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं. सरकार का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म कई गैर-कानूनी गतिविधियों का प्रमुख माध्यम बन गया है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि मामले में विस्तृत जवाब दाखिल किया जा चुका है और टेलीग्राम को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया था. सरकार के मुताबिक, टेलीग्राम से जुड़े पूरे मामले की जांच और समीक्षा एक उच्चस्तरीय समिति ने की थी, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव ने की. समिति ने टेलीग्राम की कार्यप्रणाली, सुरक्षा चिंताओं और एजेंसियों की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें दी थीं.

आखिर क्यों लगा टेलीग्राम पर बैन?
सरकार का कहना है कि टेलीग्राम के कुछ प्राइवेसी फीचर्स अपराधियों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं.प्लेटफॉर्म पर बिना फोन नंबर सार्वजनिक किए बातचीत की जा सकती है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है. हाल ही में NEET परीक्षा से पहले पेपर लीक की आशंकाओं को देखते हुए सरकार ने टेलीग्राम पर एक सप्ताह का अस्थायी प्रतिबंध लगाया था.

‘नया डार्क वेब’ बनने का आरोप
केंद्र सरकार ने दावा किया है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल लीक हुए परीक्षा प्रश्नपत्र फैलाने, साइबर फ्रॉड, ड्रग्स तस्करी, चरमपंथी कंटेंट, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री, कॉपीराइट उल्लंघन और वित्तीय अपराधों के लिए किया जा रहा है. सरकार ने इसे “नया डार्क वेब” तक करार दिया है.

टेलीग्राम का पक्ष क्या है?
टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ वकील ध्रुव मेहता ने अदालत में कहा कि कंपनी को कुछ कंटेंट हटाने के निर्देश दिए गए थे, जिनका पालन किया गया. उन्होंने तर्क दिया कि प्लेटफॉर्म एक मध्यस्थ (Intermediary) है और उस पर आईटी एक्ट के प्रावधान लागू होते हैं. वहीं हाईकोर्ट ने कहा कि वह यह जांच करेगा कि आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत सरकार द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल नियमानुसार हुआ है या नहीं. अब सभी की नजरें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं.

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