Tehran : पिछले एक सप्ताह से ईरान में चल रहे विद्रोह जैसे माहौल के पीछे अमेरिका है, घटनाक्रम पर नजर रख रहे विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अमेरिका के इशारे पर ईरान में विद्रोह हो रहा है। अमेरिका-ईरान के संबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अक्सर खराब ही रहे हैं. अक्सर आरोप लगता है कि वह ईरान को अस्थिर करना चाहता है. इसमें सच्चाई यह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है. तेल निर्यात पर रोक और बैंकिंग सिस्टम से कटाव ने हालात और खराब किए. हालांकि मौजूदा विरोध प्रदर्शनों के सीधे पीछे अमेरिका के होने के पुख्ता सबूत सामने नहीं आए हैं. अमेरिका का नाम ईरान के प्रदर्शनों से जोड़कर इसलिए देखा जा रहा है। इस वक्त इस देश की सत्ता डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में है. अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप और जॉन बोल्टन जैसे नेता हमेशा से इस बात के समर्थक रहे हैं कि ईरान में सत्ता परिवर्तन होना चाहिए. हालांकि स्पष्ट रूप से कभी भी ट्रंप ने रिजीम चेंज को लेकर कोई बयान नहीं दिया. ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी को चेतावनी देते हुए ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल (2018) में एक्स पर लिखा था- ‘ईरानी नेताओं को वो परिणाम भुगतना पड़ेगा, जो उन्होंने इतिहास में पहले कभी नहीं भुगता.’ उनके इस बयान को सत्ता परिवर्तन और सरकार गिराने की धमकी के तौर पर देखा गया था. साल 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद भी ट्रंप ने लिखा था दृ ‘अगर ईरान की सत्ता युद्ध चाहती है, तो ये ईरान का अंत होगा.’ हालांकि ट्रंप ने बाद में साफ किया था कि वो सत्ता परिवर्तन की बात नहीं कर रहे. कई बार उन्होंने ये स्पष्ट किया है कि अमेरिका सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता है लेकिन मौजूदा प्रदर्शनों को जिस तरह से अमेरिका का साथ मिल रहा है, उससे लग रहा है कि कहीं न कहीं अमेरिका, ईरान में विद्रोह भड़काना चाहता है.
ईरान में विद्रोह जारी
ईरान में आर्थिक संकट और लगातार गिरती मुद्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहे. हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए, जब दक्षिणी फार्स प्रांत के फासा शहर में प्रदर्शनकारियों ने एक स्थानीय सरकारी इमारत में घुसने की कोशिश की. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक बुधवार को प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने फासा के गवर्नरेट कार्यालय के गेट को तोड़ने की कोशिश की. कुछ वीडियो सामने आए, जिसमें उग्र लोगों का समूह इमारत के मेन गेट को तोड़ने की कोशिश करते दिखा.
चार दिन के आंदोलनों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब इस भीड़ का उग्र रूप दिखाई दिया है. सुरक्षा बलों के हस्तक्षेप से यह प्रयास नाकाम हो गया और कथित तौर पर इस समूह की अगुवाई कर रही 28 साल की महिला को गिरफ्तार कर लिया गया. समाचार एजेंसी तसनीम के मुताबिक इस झड़प में सुरक्षा बलों के 3 लोग जख्मी हुए और 4 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार भी कर लिए गए. जिस तरह के हालात बने हुए हैं, वो विरोध प्रदर्शन से विद्रोह की ओर बढ़ते हुए दिख रहे हैं. सरकार कभी बातचीत का ऑफर दे रही है तो कभी चेतावनी, बावजूद इसके समस्या का कोई हल नहीं निकल पा रहा है.
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ईरान में विद्रोह क्यों ?
ईरान में प्रदर्शन रविवार से शुरू हुए थे, जब तेहरान में दुकानदार सड़कों पर उतरे थे. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से महंगाई और जीने की परिस्थितियां मुश्किल होने के बाद ये विरोध प्रदर्शन कई अन्य शहरों में भी फैल गए. मंगलवार को तेहरान में छात्रों ने प्रदर्शन किया, वहीं इस्फहान, यज्द और जंजान जैसे शहरों की यूनिवर्सिटियों और संस्थानों में भी विरोध की खबरें सामने आईं. सरकार कह रही है कि शांतिपूर्ण विरोध जायज है, लेकिन हिंसा या अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसी बीच भीड़ ने शाह की वापसी के नारे बी लगाए, जिसके बाद यह सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को वाकई कोई बड़ा खतरा है या फिर यह सिर्फ अस्थायी अशांति है.



