Shankaracharya Avimukteshwaranand News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना संगम स्नान किए माघ मेले से वापस लौटने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा जो हमारा है उसे आपको आज नहीं तो कल देना पड़ेगा. वह हमारा अधिकार है. जो असली मुद्दा है जिसके लिए हम दस दिन तक शांति के साथ बैठे रहे. आपको हमने लंबा समय दिया कि आप विचार करें और अन्याय के लिए आगे आकर या तो दंड भोगो या क्षमायाचना करो लेकिन 10-11 दिन बीच जाने के बाद भी आज जब हमने जाने का निर्णय किया तब इस तरह का प्रस्ताव हमारे पास आया. उसे हमने इसलिए स्वीकार नहीं किया क्योंकि हमारी आत्मा इसके लिए जिंदगीभर के लिए हमें दुत्कारती. कि तुमने जो सुविधा पाई है, वो ब्रह्मचारियों-सन्यासियों के असम्मान की कीमत पर पाई है. इसको कभी भी हमारा ह्रदय स्वीकार नहीं कर सकता था. इसलिए हमने प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.
“सनातन के विरोधी सत्ता में न रह सके”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि हम भारी मन से यहां से जा रहे हैं. आप जब पूछेंगे हम तब-तब उत्तर करेंगे. लेकिन मन बोझिल है इसलिए हम जाएंगे. जो मुगलों के समय में नहीं हुआ वो कथाकथित हिंदू सरकारों के समय में हुआ है. ये बात हर सनातनी के हदय को विचार के लिए उत्तेजित करेगी और इसपर विचार करने का अवसर आएगा. देश के गृहमंत्री ने कहा कि संतों का अपमान करने वाली और सनातनियों की सूझ न लेने वाली सरकारें कभी भी स्थाई नहीं रह सकती. एक तरफ उनके तरफ से ऐसा बयान दिया जा रहा है दूसरी तरफ सनातन धर्म के सबसे बड़े शंकराचार्य, सबसे बड़ी बटुक, सबसे बड़े ब्रह्मचारी जिन्होंने सनातन को अपने कंधों पर ढोने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है.
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“साध्वियों-साधुओं का सबका यहां अपमान हो रहा है”
उन्होंने कहा कि साध्वियों-साधुओं का सबका यहां अपमान हो रहा है फिर भी गृहमंत्री के मुंह से ऐसे बयान निकल रहे हैं. ये जो दोहरा चरित्र है कहने में कुछ करने में कुछ ये देश के सामने साफ होने चाहिए. उसको साफ करने के लिए हम कार्य करेंगे. ये स्पष्ट करना होगा सनातन का नाम लेकर सनातन के विरोधी सत्ता में न रह सके.



