India US Trade Deal: भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा था कि वह देश को झुकने नहीं देंगे और किसानों के हितों को कोई नुकसान नहीं होने देंगे. इस व्यापार समझौते में इन दोनों बातों का ध्यान रखा गया है. अगर हम कृषि और कृषि उत्पादों को देखें, तो भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी उत्पाद शामिल नहीं किया गया है. ऐसे सभी उत्पादों को व्यापार समझौते से बाहर रखा गया है. सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केले, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, इथेनॉल, तंबाकू जैसे उत्पादों पर कोई टैरिफ में छूट नहीं दी गई है.
“अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाज़ार में छूट नहीं”
कृषि मंत्री ने आगे कहा कि हमारी मुख्य फसलों, फलों और डेयरी उत्पादन के लिए अमेरिका के लिए कोई द्वार नहीं खोला गया है. भारत में कोई भी लिक्विड, पाउडर, क्रीम, दही, छाछ, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर या चीज़ आयात नहीं किया जाएगा. हमारे मसाले सुरक्षित हैं. भारत से कई कृषि उत्पाद अमेरिका को ज़ीरो ड्यूटी पर निर्यात किए जाएंगे. लेकिन अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाज़ार में यह छूट नहीं दी गई है.
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“किसानों को पूरी तरह से टैरिफ में छूट”
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अमेरिका ने कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 0% कर दिया है. हमारे मसालों के निर्यात में 88% वृद्धि हुई है. हमने दुनिया भर के 200 देशों में मसाले और मसालों के प्रोडक्ट एक्सपोर्ट किए हैं. हमारे किसानों को पूरी तरह से टैरिफ में छूट मिली है. टेक्सटाइल में, हमारा टैरिफ हमारे प्रतिद्वंद्वी देशों की तुलना में काफी कम है, जो 18% है. इस समझौते से सेल्फ-हेल्प ग्रुप की महिलाओं का जीवन भी बेहतर होगा.
“भाजपा को तो गिनती भी नहीं आती”
SP प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को तो गिनती भी नहीं आती. 18% या 0%? इसमें से बड़ा क्या है? किसको फायदा होगा? जो भी इसे समझेगा, वह समझेगा कि यह कोई डील नहीं, बल्कि ‘ढीलापन’ है. पूरा बाज़ार उनके (अमेरिका के) हाथों में है.



