Shashi Tharoor : राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरुर ने बयान दिया है कि राष्ट्रपति ने वंदे मातरम संशोधन बिल को मंजूरी दे दी है लेकिन मुझे डर है कि इस बिल का मकसद राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बढ़ाना है, पूरा नहीं होगा, बल्कि इसका उल्टा भी हो सकता है। कांग्रेस संसद शशि थरूर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि यह बिल बिना किसी भी चर्चा के सदन में पास हुआ है. उन्होंने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि वह राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत का बहुत सम्मान करते हैं।
कांग्रेस सांसद ने की व्यावहारिक की बात
कांग्रेस नेता शशि थरुर ने राष्ट्रपति द्वारा वंदेमातरम संशोधन को मंजूरी देने और इसकी व्यवाहरिकता पर सवाल उठाए हैं। थरुर ने कहा कि संसद में बिना किसी चर्चा के पास हुए इस संशोधन के तहत, किसी भी सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत को भी पूरा गाना जरूरी होगा, मैं राष्ट्रीय गीत के शुरुआती दो पद और पूरा राष्ट्रगान गा सकता हूं. लेकिन मैं एक व्यावहारिक बात की ओर इशारा करना चाहता हूं कि जिसे शायद हमारे कट्टरपंथियों ने नजरअंदाज कर दिया है वो है इंसानी फितरत।
कांग्रेस नेता ने दिए ये तर्क?
कांग्रेस सांसद थरुर ने कहा कि जन गण मन के दौरान दर्शकों को सम्मानपूर्वक खड़े होकर पूरे 52 सेकंड तक फोकस करना होता है. पूरा राष्ट्रीय गीत गाने में 3 मिनट 10 सेकंड लगते हैं. तमिलनाडु ने अभी फैसला किया है कि इन दोनों से पहले तमिल भाषा में राज्य गीत भी गाया जाएगा. इसमें 2 मिनट और लगेंगे. क्या हम सच में उम्मीद करते हैं कि दर्शक हर कार्यक्रम से पहले और बाद में 5 मिनट तक यानी कुल 12 अतिरिक्त मिनट तक सम्मानपूर्वक खड़े रहेंगे? क्या सम्मान और धैर्य कानून के जरिए लागू किया जा सकता है? मुझे डर है कि इस बिल का मकसद राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बढ़ाना है, पूरा नहीं होगा, बल्कि इसका उल्टा भी हो सकता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अहम बिल को दी मंजूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार इस अहम बिल को मंजूरी दे दी है. इसके तहत जान बूझकर राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन में बाधा डालना और उसे रोकना क्राइम माना जाएगा. सरकार ने अपने बयान में कहा कि इसे वही कानूनी सुरक्षा मिलेगी, जो अभी राष्ट्रीय गान को हासिल है. लोकसभा ने 30 जुलाई को विधेयक को पारित किया था. राज्यसभा ने इसे एक दिन पहले ही मंजूरी दे दी थी।
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