HighCourt : कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने हाईकोर्ट से न्यायिक हिरासत बढ़ाने के खिलाफ दायर याचिका वापस ले ली है। इससे पहले कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के आचरण और संगठन की भूमिका पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया और बैरिकेड तोड़ा। दोनों की उम्र 27 और 31 साल बताई गई। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि वे जेन-जी नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि संगठन का उद्देश्य क्या है और याचिकाकर्ताओं का उससे क्या संबंध है।
सौरव और आशुतोष ने दी थी हाईकोर्ट में चुनौती
सरकार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया है। इसके बावजूद सौरव और आशुतोष 13 अक्टूबर को तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 14 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत खत्म हुई थी, जिसके बाद उनकी कस्टडी 2 दिन के लिए बढ़ा दी गई। दोनों नेताओं ने कस्टडी बढ़ाए जाने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी।
अगर जंतर-मंतर पर रोक थी, तो वहां गए क्यों
सीजेपी नेताओं सौरव-आशुतोष ने पहले शांति बनाए रखने का बॉन्ड दिया था, लेकिन इसके बाद फिर ऐसी घटना हुई। अगर बॉन्ड तोड़ने की आशंका सच साबित हुई है, तो अधिकारियों का सख्त नियमों के तहत कार्रवाई करना गलत कैसे है? कोर्ट ने कहा कि जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करते हैं, तो उनके साथ 10-20 और लोगों के शामिल होने की आशंका हो सकती है। समूह में शामिल दूसरे लोग ऐसी हरकत कर सकते हैं, जो प्रदर्शनकारियों के नियंत्रण से बाहर हो। इससे शांति भंग होने की स्थिति बन सकती है।
प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति लेनी थी
शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर अगर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखना था, तो पुलिस से अनुमति ली जा सकती थी। इससे ऐसे लोगों को समूह में शामिल होने से रोकने में मदद मिलती, जो प्रदर्शन का माहौल बिगाड़ सकते हैं। अगर जंतर-मंतर पर रोक थी तो वहां गए क्यों? कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं की उम्र पूछी। उनके वकील ने बताया कि एक की उम्र 27 साल और दूसरे की 31 साल है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की- ‘ये जेन जी र्- नहीं हैं।’ कोर्ट ने आगे पूछा कि वे कौन हैं, क्या करते हैं और जिस संगठन से जुड़े हैं, उसका उद्देश्य क्या है।
सौरव-आशुतोष के खिलाफ दोनों केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर
दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं से जुड़े जंतर-मंतर मामले को भी क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया है। इससे पहले कनॉट प्लेस में दर्ज केस क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था। अब दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी। मामला कनॉट प्लेस से जुड़ा था, जिसे पहले क्राइम ब्रांच को सौंपा गया।
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