Kiran Rijiju- Kharge : संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खरगे को जवाब दिया. रिजिजू ने लिखा कि सरकार ने पहले ही कई बार संपर्क किया था, 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 को पत्र लिखे गए थे. उन्होंने खुद खरगे से और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी बातचीत की थी. कांग्रेस ने चर्चा के लिए तारीख नहीं दी, इसलिए सरकार ने अन्य दलों डीएमके, समाजवादी पार्टी, वाईएसआरसीपी, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजेडी से बातचीत की. रिजिजू ने कहा कि अब बार-बार बैठक की मांग करने के बजाय रचनात्मक सहयोग की जरूरत है. सत्रावसान में देरी को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है.
खरगे ने PM मोदी को पत्र लिखा था
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. यह उनका चौथा पत्र था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो चुका है, लेकिन दोनों सदनों का सत्रावसान अभी तक नहीं हुआ है. उन्होंने दोहराया कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी नया प्रस्ताव संसद में लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि संविधान संशोधन विधेयक को फिर से जबरन पारित करने की कोशिश न की जाए, जैसा अप्रैल में हुआ था.
विधेयक में क्या-क्या प्रावधान?
दरअसल, इस पूरे प्रकरण की जड़ अप्रैल 2026 है. उस समय संविधान (131वें संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, जिसमें लोकसभा की सीटें बढ़ाने, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने और महिला आरक्षण को लागू करने का प्रावधान था. 17 अप्रैल को यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और हार गया. कई दल, जिनसे पहले बातचीत हुई थी, उसके खिलाफ वोट कर चुके थे.
अब विपक्ष पूछ रहा तीन सवाल
- क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन का कोई नया ठोस प्रस्ताव है, जिस पर किसी दल से चर्चा हो चुकी हो?
- सर्वदलीय बैठक बुलाने से सरकार क्यों बच रही है?
- क्या हारा हुआ विधेयक फिर से लाकर दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश की जाएगी?
इसपर सरकार का रुख ये है कि पहले ही पर्याप्त बातचीत हो चुकी है, जबकि विपक्ष कहता है कि चुनिंदा बैठकें काफी नहीं हैं. इस बीच दिल्ली की सियासत में अटकलें लग रही हैं कि जल्द कोई विशेष सत्र बुलाया जा सकता है, क्योंकि परिसीमन का मुद्दा, जो उत्तर-दक्षिण के बीच प्रतिनिधित्व और संघवाद से जुड़ा है, अभी भी उलझा हुआ है.
रितु बराला मामले में जीरो FIR पर अड़ी कांग्रेस, जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में धरना | KBP Times


