Abhijeet Dipke News: झारखंड में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि झारखंड में छात्रों के साथ जो हुआ, वह बेहद खराब था. जिस तरह जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई देखने को मिली थी, कुछ वैसा ही नजारा झारखंड में भी देखने को मिला. छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठियां चलाई गईं. जब राजनीतिक पार्टियां विरोध-प्रदर्शन करती हैं, तो आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता? सिर्फ़ छात्रों के खिलाफ़ ही ऐसा क्यों किया जा रहा है? मैंने देवेंद्र महतो से बात की, जिन्होंने मुझे बताया कि पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया, जबकि वे पिछले 9 दिनों से भूख हड़ताल पर थे. देश की सभी सरकारों को सोचना चाहिए कि छात्रों पर ज़ुल्म करके उन्हें क्या हासिल हो रहा है ऐसी बर्बरता नहीं होनी चाहिए. हमने देवेंद्र महतो को अपना समर्थन देने का भरोसा दिया. झारखंड में हमारी टीम छात्रों के साथ मिलकर काम कर रही है.
“अपना चेहरा चमकाना हमारा काम नहीं”
दिपके ने कहा कि वह चाहते हैं कि आंदोलन देवेंद्र महतो के नेतृत्व और उनके चेहरे पर ही आगे बढ़े. देवेंद्र महतो ने नौ दिनों तक अनशन कर बड़ा त्याग किया है और आंदोलन को मजबूत करने के लिए जो भी जरूरी होगा, उनकी टीम करेगी. वहीं रांची जाने के सवाल पर CJP संस्थापक ने कहा कि उनकी टीम पहले ही झारखंड पहुंच चुकी है और लगातार आंदोलन से जुड़े छात्रों के संपर्क में है. उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका उद्देश्य देवेंद्र महतो से फोकस हटाना नहीं है. उन्होंने कहा, वहां जाकर अपना चेहरा चमकाना हमारा काम नहीं है. देवेंद्र महतो और आंदोलन को मजबूत करना हमारा काम है. उन्होंने दावा किया कि उनकी टीम प्रदर्शन और अस्पताल दोनों जगह आंदोलनकारियों के साथ लगातार मौजूद है.
उमर खालिद की किताब पर भी दिया बयान
वहीं अभिजीत दिपके से उमर खालिद की किताब Fractured Communities: Adivasi Histories, Politics and Power को लेकर भी सवाल किया गया. जिसपर उन्होंने कहा कि मौका मिलने पर वह किताब जरूर पढ़ेंगे. आदिवासी और हाशिये पर रहने वाले समुदायों के इतिहास और उनकी समस्याओं के बारे में सभी लोगों को पढ़ना और समझना चाहिए. आदिवासी जनजातियों के बारे में बात करते हुए दिपके ने कहा कि 80 सालों के बाद भी हमारे जो गांव के स्कूल है या हमारे जो गांव है वो आज भी बहुत पिछड़े हुए हैं और उसमें अगर हम देखा जाए तो सबसे ज्यादा अन्याय किन लोगों के साथ हुआ है? आदिवासी लोगों के साथ हुआ है क्योंकि उनके जो जंगल होता है, जमीन होती है, वो छीनी जाती है. उसके बदले में उन्हें क्या मिलता है? उसके बदले में उन्हें कुछ नहीं मिलता है. उन्होंने कहा कि बड़े- बड़े व्यवसायियों को फायदा पहुंचाने के लिए उनकी जमीनों को छीना जा रहा है. लेकिन लेकिन बदले में उन्हें क्या देते हो? आदिवासियों का अधिकार कहीं ना कहीं मारा जा रहा है और उनके बच्चों को कहीं ना कहीं हम लोग एक सुरक्षित भविष्य देने में फेल हो चुके हैं.
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