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RSS का Zen-G से संवाद, भागवत बोले- बातचीत में कमी थी, इसीलिए हुआ आंदोलन

Mohan Bhagwat conversation with geng

Mohan Bhagwat : संघ प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि जेन-जी और जेन-अल्फा, पुरानी पीढ़ी से भी ज्यादा देशभक्त और ईमानदार है। उन्होंने कहा- हमें उनकी बात सुननी चाहिए। उनसे बातचीत में कमी थी, इसीलिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का मानना है कि आंदोलन करना भी संवाद का एक तरीका है। आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समूह के खिलाफ ना होकर सिस्टम सुधार के लिए होना चाहिए।

युवाओं के साथ सबसे अहम संवाद

भागवत मुंबई में एक संस्था द्वारा आयोजित 15 से 19 साल की उम्र के 2,000 से ज्यादा जेन-जी और जेन अल्फा स्टूडेंट्स के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह कार्यक्रम मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस अपनी 15वीं वर्षगांठ पर किया है। नीट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में प्रदर्शनों के बाद इसे आरएसएस का युवाओं के साथ सबसे अहम संवाद माना जा रहा है। जंतर-मंतर पर 36 दिन चले आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।

 प्रदर्शन मर्यादा में होना चाहिए

छात्रों के प्रदर्शन को एंटी नेशनल बताने के सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि जेन जी आंदोलन कर रही है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह एंटी-नेशनल है। वे अपने ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं। उनसे हमारा संबंध है। जैसे उन्हें हमारी बात समझनी चाहिए, वैसे ही हमें भी उनकी बात समझनी चाहिए। भागवत ने कहा कि मेरे अनुभव में जेन जी- जेन एल्फा हमारी पीढ़ी से अधिक ईमानदार हैं। उनमें देशभक्ति भी ज्यादा है।

आंदोलन सिस्टम में सुधार के लिए होना चाहिए

भागवत ने कहा कि हम यह नहीं कहेंगे कि जेन जी को आंदोलन नहीं करना चाहिए। संविधान लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। लेकिन यह भी देखना चाहिए कि आंदोलन कैसे किया जा रहा है। हमें यह भी समझना होगा कि अगर जेन जी आवाज उठा रही है, तो उसके पीछे कोई न कोई वास्तविक समस्या जरूर होगी। आंदोलन किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम में सुधार के लिए होना चाहिए। अगर संवाद में कमी न होती, तो आंदोलन की नौबत ही नहीं आती।

भागवत बोले- आंदोलन संवाद का तरीका है

भागवत ने कहा कि आंदोलन भी संवाद का एक तरीका है। हम यहां बैठकर बात कर रहे हैं कि नहीं तो हमारा डिबेट चलेगा। आप किसी भी कठिनाई में हो तो संवाद से हल होगा, मैं कहूंगा कि यह अर्जेंट है। लोकतंत्र में प्रदर्शन भी एक डिस्कशन का तरीका है। अगर कुछ करना है, तो सबको साथ लेकर करना चाहिए, बंटवारे के साथ नहीं। जहां तक जेन जी की बात है, शिक्षा में सुधार की जरूरत है, इसलिए संवाद बेहद जरूरी है। मेरा अनुभव है कि जब हम इस उम्र में थे, तब हमारा स्वभाव सवाल न करने का था। लेकिन जेन जी हर बात का तार्किक जवाब चाहती है। उसे सिर्फ जवाब ही नहीं, बल्कि अपनापन और स्नेह भी चाहिए।

भाजपा नेता बोले- कार्यक्रम पुरानी परंपरा का हिस्सा, नई पहल नहीं

भागवत के जेन-जी और जेन-अल्फा छात्रों से बातचीत कार्यक्रम पर भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि भागवत हमेशा से युवाओं से संवाद करते रहे हैं। यह लंबे समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है, कोई नई पहल नहीं है।

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