Raghav Chadha: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आज सोमवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया. उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से मेरे पास बहुत मैसेज आ रहे हैं ज्यादातर लोग मुझे शुभकामनाएं दे रहे हैं. कुछ लोग मेरे आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के पीछे क्या कारण है वो पूछ रहे हैं. आज ये वीडियो उन्हीं लोगों के लिए है. मैं राजनीति में आने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट था, मेरे सामने एक बेहतरीन कैरियर था, लेकिन मैं अपने करियर को बनाने के लिए नहीं बल्कि करियर छोड़कर राजनीति में आया था. मैं एक पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना, मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए, मैंने खून-पसीने से पार्टी को सींचा. लेकिन आज ये पार्टी पुरानी वाली पार्टी नहीं रही. आज इस पार्टी में टॉक्सिक एनवायरनमेंट है. संसद में बोलने से रोका जाता है. आम आदमी पार्टी अब उन लोगों के हाथों में फंसकर रह गई है जो कि अपने निजी फायदे के लिए काम कर रहे हैं. पिछले कुछ सालों से मैं पार्टी में धीरे-धीरे खुद को असहज और अलग-थलग महसूस कर रहा था.
“सांसद चड्ढा ने खुद को सही व्यक्ति लेकिन गलत पार्टी में बताया”
राज्यसभा सांसद ने खुद को सही व्यक्ति लेकिन गलत पार्टी में बताया. राघव ने आगे कहा कि इसके चलते मेरे सामने तीन विकल्प थे, पहला विकल्प कि मैं राजनीति ही छोड़ दूं, दूसरा विकल्प था कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं और तीसरा विकल्प था कि मैं अपनी एनर्जी और एक्सपीरियंस लेकर पॉजिटिव राजनीति करूं, एक और प्लेटफॉर्म के साथ, एक अन्य पार्टी के जुड़कर सकारात्मक राजनीति करूं. इसलिए मैंने अकेले ने नहीं, मेरे साथ एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं, पांच नहीं, छह नहीं बल्कि कुछ सात सांसदों ने मिलकर यह फैसला लिया कि हम अपनी इस राजनीतिक पार्टी से रिश्ता तोड़ते हैं.
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“लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते”
राघव चड्ढा ने आगे कहा कि एक व्यक्ति गलत हो सकता है, दो भी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते. वे सभी लोग जो पढ़े-लिखे थे और इस पार्टी के सपने के साथ जुड़े थे, आखिरकार उसे छोड़कर चले गए, क्या वे सब गलत हो सकते हैं? दबाव या डर की वजह से पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने के आरोपों को राघव चड्ढा ने खारिज किया. उन्होंने कहा कि इसे ऐसे समझिए आप में से जो लोग नौकरी करते हैं, अगर आपका कार्यस्थल जहरीले माहौल वाला हो जाए तो क्या आप ठीक से काम कर पाएंगे?
उन्होंने कहा कि अगर आपके काम को दबाया जाए और आपको चुप कराया जाए, तो आप क्या करेंगे? ऐसी स्थिति में सही फैसला यही होता है कि उस कार्यस्थल को छोड़ दिया जाए. शायद हमने भी वही किया. राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि कई लोगों ने उनसे पूछा कि क्या वे अब भी आम जनता के मुद्दे उठाते रहेंगे. इस पर उन्होंने जवाब दिया कि मैं पहले से भी ज्यादा ऊर्जा और जोश के साथ आपके मुद्दों को उठाता रहूंगा, और न सिर्फ समाधान ढूंढूंगा बल्कि उन्हें लागू भी कराऊंगा.



