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“तो कौन जिम्मेदार है…” अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी पर प्रियंका गांधी ने खड़े किए सवाल

Ram Mandir Donation Scam

Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या राम मंदिर के कथित चंदे में गड़बड़ी के मामले पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि पूरे देश से लोगों ने, जो मानते हैं, और जिनकी आस्था है, उन्होंने चंदा दिया और अब वह चंदा चोरी हो गया है. यह दुखद है. यह शर्मनाक है. यह सिर्फ बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा दिया गया फंड नहीं है. यह वह फंड है जो हर नागरिक से इकट्ठा किया गया है. इसे इकट्ठा करने के लिए एक मुहिम चलाई गई थी. तो कौन जिम्मेदार है? अगर आपने इसे इकट्ठा किया है, तो इसे सुरक्षित रखना आपकी जिम्मेदारी है.

“ट्रस्ट को भंग किया जाए”
इसके अलावा आज दिल्ली में कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि जब हमने, जनता ने इस मामले का खुलासा किया, तब ये लोग कह रहे थे कि कोई घोटाला ही नहीं हुआ है. जैसे-जैसे परतें खुलती गईं, लाखों-करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आते गए. इसके बाद SIT बनाई गई. FIR शुरु से दर्ज नहीं की गई. जिस दिन से मंदिर ट्रस्ट ने काम शुरू किया, उसी दिन से यह ट्रस्ट भ्रष्टाचार की चपेट में रहा है. भूमि घोटाले और अनियमितताओं के खुलासे पहले ही हो चुके थे. मंदिर निर्माण के साथ-साथ ट्रस्ट में भ्रष्टाचार भी चलता रहा और लगातार नए खुलासे होते गए. जब मामला ज्यादा बढ़ गया, तब जाकर SIT बनाई गई, लेकिन वह भी लीपापोती कर रही है. FIR में छोटे-छोटे लोगों के नाम हैं, जबकि जो जिम्मेदार पदों पर बैठे हैं, उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? उनके नाम इसमें क्यों नहीं हैं? कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि इस ट्रस्ट को भंग किया जाए. इस पर अब किसी को भरोसा नहीं है.

अखिलेश प्रसाद सिंह ने आगे कहा कि जमीन खरीद से लेकर निर्माण, चंदा, चढ़ावा, आभूषण, रत्न और बहुमूल्य धातुओं तक में लूट हुई है. ट्रस्ट के एक सदस्य ने भी कहा है कि डाका पड़ा है. इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए और जो भी जिम्मेदार हैं, उनकी गिरफ्तारी की जानी चाहिए.

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खामोश क्यों हैं?”
उन्होंने कहा कि चंपत राय ने शुरु में कहा कि इसमें कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी नहीं हुई. लेकिन जैसे-जैसे परतें खुलती गईं, ट्रस्ट के ही एक वरिष्ठ सदस्य ने इसे भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि ‘डाका’ बताया. ये बेहद गंभीर विषय है, क्योंकि यह मामला करोड़ों भारतीयों की आस्था से जुड़ा हुआ है. राम मंदिर के लिए करोड़ों भारतीयों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ दान दिया, लेकिन ट्रस्ट ने लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया और जमकर लूट की. उन्होंने कहा कि राम मंदिर के ट्रस्ट ने वित्तीय जांच-पड़ताल के लिए एजेंसियों को नियुक्त किया था. उन एजेंसियों ने कई सुझाव दिए, लेकिन ट्रस्ट के लोगों ने उन सुझावों को नजरअंदाज कर दिया. जब चोरी की घटनाओं का खुलासा होने लगा. मंदिर के कैश काउंटिंग एजेंट महिपाल सिंह ने कई बातें सार्वजनिक कीं तो उन्हें पद से हटा दिया गया.

उन्होंने कहा कि जब और खुलासे होने लगे,तो CCTV कैमरे हटा दिए गए और कैमरों की रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी गई. इस मामले में SIT की रिपोर्ट के बाद कुछ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई, लेकिन इसमें सिर्फ छोटे कर्मचारियों का नाम ही शामिल था. खबर ये भी आई कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन थोड़ी देर बाद ही कहा गया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ. कांग्रेस पार्टी पहले से ही कहती रही है कि इन लोगों की नीयत सही नहीं है, लेकिन इस बात को गंभीरता से नहीं लिया गया. देश जानना चाहता है कि इतने बड़े मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खामोश क्यों हैं?

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