PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के 25 साल पूरे हुए हैं। दरअसल भाजपा ने इन सालों में गुजरात में मोदी के सीएम पद के कार्यकाल को भी जोड दिया गया है। दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में अपने सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान हूं। जीवन में क्या बनूंगा, कभी सोचा ही नहीं। जिसने गिराया, उसी ने खड़ा होना सिखाया।
जिसने विरोध किया उसने शक्ति समझाई
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जिसने मेरा विरोध किया, उसने मुझे लोकतंत्र की शक्ति समझाई। मैंने ईश्वर से मांगा की कि सीखना कभी कम न हो। पीएम मोदी ने कहा, “आज जितना पीछे मुड़कर देखता हूं, उतना कृतज्ञता का भाव ही आता है। हर घटना ने मुझे कुछ न कुछ ही सिखाया है। मुझे नम्र होना सिखाया।
मोदी बोले- 2014 में देश निराशा में डूबा था, कई चुनौतियां थी
पीएम मोदी ने कहा, जब गुजरात पहुंचा तो प्रशासनिक व्यवस्था का ज्यादा ज्ञान नहीं था, तब सिर्फ जनशक्ति का भरोसा था। इसी विश्वास को मैंने अपना सामर्थ्य बनाया। मैंने जनता को साथ लेकर निर्णय लिए, नीतियां बनाई और इन्हें लागू किया। यही मंत्र- वी विल डू इट…जब जनता साथ हो तो परिणाम ही आते हैं। गुजरात ने करके दिखाया। उन्होंने कहा, आज गुजरात जहां पहुंचा, उसका उदाहरण दुनिया देती है। गुजरात में जो मिला, उसने बहुत कुछ सिखाया। जो मैंने सीखा, वो अनुभव आज तक काम आ रहा है।
पीएम बनने के बाद
पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में मेरे दायित्व का विस्तार हुआ। मेरा दायरा बढ़ा दिया। तब विकराल चुनौतियां मुंह बाए खड़ी थीं। देश का हर नागरिक नया रास्ता खोज रहा था। भारत की इकोनॉमी को लेकर दुनिया कहने लगी थी- इट्स अ गॉन केस। तब कोई ज्योत दिखती नहीं थी। निराशा में डूबे देश को आशा की जरूरत थी। मैंने वही काम किया, जो मुझे आता था। मैंने लोगों के साथ मिलकर काम किया और उनके साथ मिलकर फिर दोहराया- वी विल डू इट। अब तस्वीर बदल गई है।”
25 साल में देश कहां पहुंचा, ये अहम
पीएम मोदी ने कहा, “हमने इस राष्ट्र में जन्म लिया है, ये एहसास ही अमृत है। इसके सामने सत्ता सुख कुछ नहीं है। पद-प्रतिष्ठा तो कहीं भी मिल सकता है, लेकिन भारत जैसी पुण्यभूमि नहीं मिलेगी। वो भारत, जिसने अंधकार के युग में भी मानवता को ज्ञान दिया, मूल्यों का प्रकाश दिया, उसकी सेवा का मौका अमूल्य है। 25 सालों का आकलन इससे नहीं होगा कि मैं कहां पहुंचा, बल्कि इससे होगा कि मेरा देश कहां पहुंचा।”
कर्म देश के लिए साधना है
पीएम ने कहा, “जीवन का एक ही ध्येय था, देश के लिए निस्वार्थ कर्म। मेरे लिए कर्म ही सबकुछ है। कर्म ही मेरा धर्म है। गीता ने हमें सिखाया है कर्मण्ये वाधिकारस्ते, मैं कर्म को अपना धर्म मानता हूं। हर कर्म पूरी क्षमता से करता रहूं।”
यह भी पढ़ें –पंजाब CM के कैंप ऑफिस में CBI की रेड, मान बोले-बीजेपी ने शुरु कर दी चुनाव की तैयारी
यह भी देखें – जयपुर में Central Park जैसी सुविधाएं बाकी पार्कों में क्यों नहीं? लोगों ने सरकार से पूछे सवाल



