MLC Election Results 2026: उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव परिणामों ने सियासी समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है. बीजेपी ने सबसे ज्यादा 13 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय वाले नागपुर में मिली हार ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है. वहीं कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीतने के बावजूद बीजेपी पर हमलावर है.
वाराणसी और नागपुर की हार पर कांग्रेस का तंज
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की सीटें गिनने से पहले उन्हें वाराणसी की दोनों सीटों और नागपुर में बीजेपी की हार पर आत्मविश्लेषण करना चाहिए. नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को हराकर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा.
यूपी में बीजेपी को 6, सपा को 5 सीटें
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों में बीजेपी ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतीं. वाराणसी की स्नातक और शिक्षक दोनों सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की पार्टी के लिए इन परिणामों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बिहार में जेडीयू को नुकसान, जनसुराज को सफलता
बिहार की आठ सीटों में बीजेपी ने तीन और जेडीयू ने एक सीट जीती. आरजेडी और प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को एक-एक सीट मिली, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे. जेडीयू चार सीटों पर चुनाव लड़कर केवल एक जीत सकी.
महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी का दम
महाराष्ट्र की पांच सीटों में बीजेपी और शिवसेना को एक-एक सीट मिली. शरद पवार गुट की एनसीपी ने पुणे और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीटें जीतीं. कांग्रेस ने नागपुर स्नातक सीट बरकरार रखी. बीजेपी ने खराब प्रदर्शन के लिए सहयोगी शिवसेना से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात कही.
कर्नाटक में कांग्रेस का सूपड़ा साफ
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी चारों सीटें हार गई. बीजेपी ने तीन और जेडीएस ने एक सीट जीती. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.
नतीजों का सियासी संदेश
इन चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी, लेकिन वाराणसी और नागपुर की हार ने विपक्ष को हमला करने का मौका दिया। कांग्रेस के लिए कर्नाटक की हार चिंता का विषय है, जबकि सपा और शरद पवार गुट को नतीजों से नई राजनीतिक ताकत मिली है.
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