Sonia Gandhi : भारतीय नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से जुड़े मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. राऊज एवेन्यू के स्पेशल कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कांग्रेस नेता का नाम 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल होने के आरोप की जांच करने से इनकार कर दिया गया था. कोर्ट ने मामले में नए सिरे से सुनवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं.
स्पेशल कोर्ट ने दिया निर्देश
स्पेशल कोर्ट ने फैसले में मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से शिकायत के निपटारे की कड़ी आलोचना की है. स्पेशल जज के अनुसार, मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में साफ तौर पर विवेचना का अभाव दिखाई दिया, जिसके चलते कोर्ट ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के निर्देश के साथ वापस भेज दिया.
आदेश में कानून की साफ गलती
जज ने कहा कि बीएनएस की धारा 175(3) का पालन न करने, संबंधित पुलिस अधिकारी की दलीलें न सुनने और संबंधित पुलिस स्टेशन से स्थिति रिपोर्ट न मंगवाने के चलते विवादित आदेश में कानून की साफ गलती है. उन्होंने कहा कि आदेश का तर्कहीन स्वरूप साफ है, क्योंकि मजिस्ट्रेट ने कानून के तहत उपलब्ध दो विकल्पों पर विचार नहीं किया. जज ने कहा मजिस्ट्रेट को यह देखना चाहिए था कि कोई गंभीर अपराध हुआ है या नहीं, लेकिन उन्होंने उस बात पर ध्यान देने के बजाय व्यक्ति की नागरिकता के मुद्दे पर रुख किया. न्यायालय ने मामले को मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया है, ताकि वे नए सिरे से दलीलें सुनने के बाद तर्कसंगत आदेश पारित कर सकें.
याचिका में क्या आरोप?
सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल याचिका में कहा गया है कि उन्होंने ने 30 अप्रैल 1983 में नागरिकता हासिल की थी, जबकि उनका नाम 1980 की वोटर लिस्ट में शामिल था. याचिका में सवाल उठाया गया था कि 1980 की नई दिल्ली की वोटर लिस्ट मे नाम कैसे शामिल था.
29 सितंबर को अगली सुनवाई होगी
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1982 मे सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट से आखिर क्यों डिलीट किया गया. याचिका में सवाल उठाया गया था कि जब 1983 में नागरिकता हासिल की तो किन डॉक्यूमेंट्स के आधार पर 1980 में वोटर लिस्ट मे नाम शामिल कराया गया क्या फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया. कोर्ट ने मामले को मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया ताकि वे नए सिरे से दलीलें सुनने के बाद तर्कसंगत आदेश पारित कर सकें. मामले की आगे की सुनवाई 29 सितंबर को होगी.
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