Oil Deal : अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल भंडार पर अपना अधिकार जमा लिया है। करीब 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार पर कंट्रोल हासिल करने के लिए अमेरिका ने वेनेजुएला से एक समझौता किया है। जानकारी के अनुसार अमेरिका के पास खुद करीब 46 अरब बैरल तेल है। बता दें कि भारत से तुलना करें तो देश हर साल करीब 1.6 से 1.7 अरब बैरल कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इस हिसाब से 65 अरब बैरल तेल भारत के 40 साल के ऑयल इम्पोर्ट के बराबर है।
दोनों देशों के बीच साझेदारी से काम
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह काम वेनेजुएला में काम करने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा। इस साझेदारी से निकलने वाले तेल में अमेरिका को 55 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। निजी कंपनी का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे दुनिया की सबसे बड़ी डील बताया है। वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी इसे ऐतिहासिक समझौता बताया है।
वेनेजुएला में 300 अरब बैरल तेल मौजूद
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। वहां 300 अरब बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है। ट्रम्प जिस 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिकी कंट्रोल की बात कर रहे हैं, वह वेनेजुएला के कुल तेल भंडार का करीब पांचवां हिस्सा है। वेनेजुएला के पास इतना बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वहां उत्पादन काफी कम है। आर्थिक संकट, निवेश की कमी और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसका तेल उद्योग लंबे समय से मुश्किल में है।
अमेरिका के हिस्से में कितना तेल आएगा
बताया जा रहा है कि इस डील में सबसे अहम बात अभी भी साफ नहीं है। अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल का मालिकाना हक मिलेगा या सिर्फ उसके उत्पादन में बड़ा हिस्सा मिलेगा, यह बात सामने आना अभी बाकी है।
100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश
वेनेजुएला राष्ट्रपति रोड्रिग्ज के मुताबिक, समझौते के तहत वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों को दोबारा विकसित किया जाएगा। इसमें 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश होने की बात कही गई है। उनका कहना है कि इस पूरे काम से वेनेजुएला की सरकार को आने वाले समय में करीब 209 अरब डॉलर टैक्स मिल सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला अपने बड़े तेल भंडार का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करना चाहता है।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदले रिश्ते
बता दें कि अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते जनवरी में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदल गए। डेल्सी रोड्रिग्ज के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों में बातचीत बढ़ी और वेनेजुएला का तेल इसका सबसे अहम मुद्दा बन गया। इसके बाद वेनेजुएला ने तेल उद्योग के नियम बदले। नए नियमों से विदेशी कंपनियों को ज्यादा अधिकार मिले और अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां निवेश और तेल उत्पादन बढ़ाने का रास्ता खुल गया।
वेनेजुएला के पास सबसे ज्यादा तेल, फिर भी गरीब
वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। देश की सरकारी तेल कंपनी कमजोर हुई, तेल उद्योग में निवेश कम हुआ और उत्पादन लगातार गिरा। इसके अलावा अमेरिकी प्रतिबंधों ने भी तेल कारोबार को नुकसान पहुंचाया। यानी जमीन के नीचे तेल बहुत है, लेकिन उसे निकालने, बेचने और उससे कमाई करने की क्षमता कमजोर हो गई। इसके साथ ही देश में कई साल तक महंगाई, आर्थिक कुप्रबंधन और राजनीतिक अस्थिरता रही। इसका सीधा असर आम लोगों की कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा।
इस डील से OPEC को चुनौती
OPEC तेल उत्पादक देशों का समूह है। इसके सदस्य तेल का उत्पादन घटाकर या बढ़ाकर बाजार में सप्लाई को प्रभावित करते हैं। सप्लाई कम हो तो कीमत बढ़ सकती है और ज्यादा तेल आने पर कीमत घट सकती है। हालांकि वेनेजुएला भी ओपेक का सदस्य है। अगर वेनेजुएला का उत्पादन बढ़ा और बाजार में ज्यादा तेल आया, तो तेल की कीमतों पर गिरावट का दबाव बन सकता है। वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा।
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