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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के संगम तट से स्नान किए बिना लौटने पर DC, डीएम-एसपी की आई प्रतिक्रिया, क्या कहा?

Magh Mela 2026

Magh Mela 2026: प्रयागराज माघ मेले में आज मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज पर विवाद खड़ा हो गया. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के जुलूस को लेकर तनावपूर्ण हो गए. इस दौरान पुलिस और शंकराचार्य के समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई. जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम तट पर स्नान किए बिना लौट गए. जिसको लेकर अब प्रयागराज मंडल की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद परंपरा के विपरीत और बिना किसी अनुमति के अपने पालकी पर सवार होकर यहां अपने करीब 200 अनुयायियों के साथ आए थे, यहां संगम पर बहुत अधिक भीड़ थी. यहां करोड़ी की भीड़ थी, वे बैरियर तोड़कर आए और 3 घंटे तक हमारा वापसी मार्ग अवरुद्ध किया जिससे जनसामान्य को बहुत असुविधा हुई.

प्रयागराज DM मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि परंपरा के विपरीत संगम पर स्नान करने वे(स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद) बिना अनुमति के अपनी पालकी पर आए थे. उस समय संगम पर बहुत ज्यादा भीड़ थी, बार-बार अनुरोध करने के बाद भी वे बिना अनुमति के यहां आए और अपनी ज़िद पर अड़े रहे, यह गलत था. अन्य कई पहलु भी संज्ञान में आए हैं कि उनके समर्थकों द्वारा बैरियर तोड़े गए और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की गई तो इस पूरे मामले की हम जांच कर रहे हैं. हम सभी पहलुओं की जांच कर विधिक कार्रवाई करेंगे.

“तो भगदड़ मच सकती है”
प्रयागराज पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुबह करीब 9 बजे यहां आए, यह जगह सुरक्षा कारणों से कल से बंद है. उनकी और उनके समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हुई. उनके समर्थकों ने बैरिकेड भी तोड़े, जिसका CCTV फुटेज हमारे पास है. जब उन्हें बताया गया कि वे परंपरा के खिलाफ जा रहे हैं, तो उन्होंने अपने रथ और समर्थकों के साथ लगभग तीन घंटे तक वापसी का रास्ता अवरुद्ध किया. इससे अफरा-तफरी मच गई. वे अपने सभी 200 समर्थकों और एक रथ के साथ संगम नोज पर जाने की जिद पर अड़े थे, जो परंपरा के खिलाफ है. यहां आने वाला हर श्रद्धालु बराबर है. हमने उन्हें समझाने की कोशिश की कि अगर वे रथ और 200 लोगों के साथ आगे बढ़ते हैं, तो भगदड़ मच सकती है.

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“संगम नोज पर जाने की जिद पर अड़ गए”
पुलिस कमिश्नर ने आगे कहा कि सुबह कोहरे की वजह से संगम पर सबसे ज़्यादा भीड़ सुबह 9-10 बजे के आसपास थी, तभी वे आए और संगम नोज पर जाने की जिद पर अड़ गए. किसी भी संत को परंपरा के खिलाफ जाने की इजाज़त नहीं दी गई है, और सभी से आम आदमी की तरह ‘स्नान’ करने को कहा गया है. तीन घंटे तक वापसी का रास्ता रोकने के बाद, वे अपने आश्रम लौट गए. हर व्यक्ति की हर गतिविधि पर CCTV से नज़र रखी जा रही है, इसलिए कहीं भी किसी तरह के भेदभाव का सवाल ही नहीं है. हम CCTV फुटेज का विश्लेषण करने के बाद ज़रूरी कार्रवाई करेंगे.

 

 

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