Opposition Suspension:लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने आज मंगलवार को सदन में बड़ा फैसला सुनाते हुए बजट सत्र के दौरान निलंबित किए गए 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन समाप्त कर दिया है. इन सांसदों को सदन में हंगामा और अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप में पूरे सत्र के लिए सस्पेंड किया गया था. सस्पेंशन रद्द किए जाने के बाद 8 विपक्षी सांसदों ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की. सांसदों का सस्पेंशन रद्द होने पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने कहा कि यह अच्छी बात है. यह(सदन की गरिमा बनाए रखते हुए) दोनों तरफ से होना चाहिए. कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि हम सदन का, अपने नेतृत्व का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने कल स्पीकर से चर्चा करके इस ओर फैसला लिया. हम भी इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहते हैं लेकिन यहां पर सबको अपनी बात रखने का अधिकार है.
“विपक्ष सत्ता पक्ष के लिए आइना होता है”
औजला (Gurjeet Singh Aujla ने आगे कहा कि यदि आप लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और चुने हुए नेता को भी नहीं बोलने देंगे तो ऐसी स्थिति पैदा होती है. इसी बात को लेकर उस समय ये कहासुनी हुई और उस समय जो संसद नहीं चलने दिया गया. हमारा केवल इतना कहना है कि विपक्ष सत्ता पक्ष के लिए आइना होता है और सत्ता पक्ष को आइने की ओर देखना चाहिए. हम भी चाहते हैं कि हम किसी सीमा को पार न करें लेकिन सबसे पहले सदन को चलाने का काम सत्ता पक्ष का है. हमारी जो बात है उसे हमें सदन में रखने का मौका तो दें, चाहें बाद में उसे नकार दें.
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“कभी-कभी स्पीकर एकतरफा फैसला करते हैं”
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग (Amarinder Singh Raja Warring) ने सांसदों का सस्पेंशन रद्द होने पर कहा कि मैं धन्यवाद देना चाहता हूं लेकिन फैसला बहुत देर से आया. दो दिन का निलंबन होता है, चार दिन का होता है लेकिन हमने क्या किया था? हमारे नेता को बोलने नहीं दिया गया, कुछ दिन तक हमने गरिमा में रहकर विरोध किया फिर भी उन्होंने उन्हें बोलने नहीं दिया. जब हमने लड़ाई लड़ी तो उन्होंने हमें सस्पेंड कर दिया और उन्होंने मन में सोच लिया कि वो इसे रद्द नहीं करेंगे. इतने दिनों बाद उन्हें हमारी याद आई. हमें भी लगता है कि आप भेदभाव करते हैं. निशिकांत दुबे जब चाहें हाथ खड़े कर देते हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए. हमें लगता है कि कभी-कभी स्पीकर एकतरफा फैसला करते हैं जिससे हम भी नाराज होते हैं और जनता को भी लगता है कि ये गलत हो रहा है. मैं यह भी कहना चाहता हूं कि हमारे साथ आप भेदभाव मत करिए और हमारी आवाज़ को न दबाएं. कभी-कभी ऐसा लगता है कि संसद सिर्फ़ निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह और बिट्टू का ही है.
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