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देशभर में आज जन्माष्टमी की धूम, मंदिरों पर विशेष सजावट, झांकियों का प्रदर्शन

Krishnjanmashtmi

Krishnjanmashtmi : आज देशभर में जन्माष्टमी का महापर्व मनाया जा रहा है. भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में सभी मंदिरों पर जन्माष्टमी की धूम है। वहीं वाराणसी, उज्जैन, वृन्दावन में गुरुवार की आधी रात कृष्ण मंदिरों पर भक्तों की भीड उमडी। मंदिरों पर विशेष सजावट और झांकियां सजाई गई हैं। जन्माष्टमी पर आज देश के सभी छोटे बडे मंदिरों पर दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है। महिलाओं ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा है। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, यूपी के मुख्यमंत्री योगी ने जन्माष्टमी पर देशवासियों को बधाई दी है।

जन्माष्टमी के कई नाम

जन्माष्टमी को कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, कृष्ण जयंती, श्रीकृष्ण जयंती, यदुकुलाष्टमी और अष्टमी रोहिणी के नामों से भी जाना जाता है. हर साल यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. यह पर्व भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, यह भगवान कृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव है.

जन्माष्टमी पर विशेष व्रत

आचार्य के अनुसार जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की उपासना की जाती है. कृष्ण भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान का श्रृंगार करते हैं. लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं और उन्हें पालने में बैठाकर झुलाया जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजन का मुहूर्त

आचार्य से प्राप्त जानकारी के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की तिथि 4 सितंबर यानी आज अर्धरात्रि में 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो चुकी है, जो कि 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. आज श्रीकृष्ण की पूजा का मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जिसके लिए कुल 45 मिनट मिलेंगे. इसी अवधि में लड्डू गोपाल का जन्म होगा और जन्मोत्सव मनाया जाएगा. भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था और इसलिए, कृष्ण जन्माष्टमी हमेशा रोहिणी नक्षत्र में ही मनाई जाती है. रोहिणी नक्षत्र अर्धरात्रि में 12 बजकर 29 मिनट पर लग चुका है और इसका समापन आज रात 11 बजकर 4 मिनट पर होगा.

कृष्ण जन्माष्टमी की पूजन सामग्री

जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर लड्डू गोपाल के पूजन और भव्य श्रृंगार के लिए मुख्य रूप से बाल गोपाल की मूर्ति, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और ताजे फूलों की आवश्यकता होती है. इसके साथ ही भगवान के अभिषेक के लिए पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) और उनके प्रिय भोग के रूप में माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतुफल, मिठाई तथा पान-सुपारी तैयार की जाती है, जिसमें तुलसी दल मिलाना अत्यंत अनिवार्य माना गया है.

कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा

कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरे दिन सात्विक रहते हुए व्रत का संकल्प लें. पूजन स्थल एवं मंदिर को अच्छे से साफ कर सजाएं और बाल गोपाल के लिए एक सुंदर झूला तैयार करें. मुख्य पूजा मध्यरात्रि 12 बजे की जाती है, जब भगवान का जन्म हुआ था; इस समय लड्डू गोपाल को पहले गंगाजल और फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराकर नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से उनका दिव्य श्रृंगार करें.

इसके बाद उन्हें झूले में विराजमान कराकर प्रेमपूर्वक झूला झुलाएं और उनके अत्यंत प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत एवं फलों का भोग लगाएं, जिसमें तुलसी दल मिलाना अनिवार्य माना गया है. अंत में धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें, अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें और सभी में प्रसाद बांटकर अपना व्रत खोलें.

इन दिव्य मंत्रों का करें जाप

– कृं कृष्णाय नमः
– ऊं देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णरूप्रचोदयात
– ओम क्लीम कृष्णाय नमः
– गोकुल नाथाय नमः
– ऊं नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नमरू

कृष्ण जन्माष्टमी उपाय

जन्माष्टमी की रात 12 बजे लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव के बाद केसर मिश्रित दूध से उनका अभिषेक करें. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का वास होता है.
जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण को पान का पत्ता अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि अगले दिन उस पत्ते पर रोली से श्री यंत्र बनाकर उसे तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है.

यह भी पढ़ें –कृष्ण जन्माष्टमी पर तुलसी को कैसे करें अर्पित ? और कुछ भूल करने से बचें

यह भी देखें – जयपुर में कान्हा की 300 साल पुरानी विरासत | Govind Dev Ji, Gopinath Ji और Kanak Vrindavan का रहस्य

 

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