Maulana Jarjis Ansari: यूपी के मौलाना जर्जिस अंसारी के भगवान श्रीकृष्ण पर दिए बयान से बवाल मचा हुआ है. तमाम हिंदू संगठन और साधु-संत उनकी तीखी आलोचना कर रहे हैं. इसी बीच अयोध्या तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि आज हमने महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजकर, और मौलाना जर्जिस अंसारी ने जिस तरह से स्टेटमेंट दिया है कि भगवान श्रीकृष्ण मुसलमान थे और पांच वक्त की नमाज पढ़ते थे. अगर इसी तरह कोई सनातनी उनके अल्लाह के बारे में कह दिया होता, तो आज भारत ही नहीं, बल्कि 57 इस्लामिक देशों में हाय-तौबा मच गई होती, मारकाट मची होती, तमाम पत्थरबाज आज रोड पर होते.
जगद्गुरु परमहंस ने आगे कहा कि लगातार हिंदू देवी-देवताओं के प्रति अभद्र टिप्पणी करना और हिंदुओं को बार-बार कहीं लव जिहाद, कभी लैंड जिहाद, कभी व्यापार जिहाद, कभी फिल्म जिहाद, कहीं चिकित्सा जिहाद, माने हिंदू अस्तित्व को समाप्त करने का गजवा-ए-हिंद इनके अंदर-अंदर चल रहा है. आज हमने महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र के माध्यम से हार्दिक निवेदन किया है कि भारत में नमाज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए.
“भारत में नमाज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए”
उन्होंने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को हमने पत्र भेजकर मांग की है कि भारत में नमाज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए. क्यों? क्योंकि इस्लाम एक ऐसी उपासना है, जो दूसरी उपासनाओं को निगल जाती है. और इसका उदाहरण है 16 अगस्त 1946 डायरेक्ट एक्शन डे, 1990 हिंदू नरसंहार कश्मीर. अभी मौलाना जर्जिस अंसारी इन्होंने जो भगवान श्रीकृष्ण को नमाजी बताया, जबकि पैगंबर मुहम्मद के पहले कोई मुसलमान ही नहीं था धरती पर.
पैगंबर मोहम्मद ने इस्लाम की शुरुआत किया जो साढ़े चौदह सौ वर्ष पहले आए और भगवान श्री कृष्ण का अवतार साढ़े पांच हज़ार वर्ष पहले हुआ. तो इस तरह से जो है यह सिर्फ जो है गजवा ए हिंद का हिस्सा है. ये लोग चाहते हैं कि भारत में भारतीय संस्कृति को खत्म करके और यहां जैसा कि इनके अंदर अंदर खिचड़ी पक रही है कि पूरे विश्व को जो है इस्लामी को बना देंगे. तो भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए हमने गुहार लगाया है महामहिम राष्ट्रपति महोदय से कि भारत में नमाज पर प्रतिबंध लगाया जाए.
जगद्गुरु परमहंस ने कहा कि वैसे भी जब यहां विविध उपासनाओं की मान्यता है तो कोई भी यह कहे कि जिसको हम मानते हैं उसके अलावा दूसरा पूजा के लायक ही नहीं है. तो मुसलमानों में जो कलमा पढ़ा जाता है उसमें इनका अर्थ भावार्थ है कि अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं है, पूजा के लायक नहीं है और कट्टरता भी इनकी देखी जाती है कि जहां जनसंख्या इनकी बढ़ जाती है वहां ये पत्थरबाजी से लेकर के और बम बांधकर के फटने तक का सब काम कर रहे हैं.
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