Indore Contaminated Water Crisis: मध्यप्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों की मौत का आकंड़ा लगातार बढ़ रहा है. 17 लोगों की मौत के बाद भी हालात संभल नहीं पा रहे हैं. 7 दिन से भागीरथपुरा में मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है. संजीवनी क्लीनिक पर रविवार को 65 नए मरीज मिले. इनमें से 28 लोगों को दस्त की शिकायत थी. जांच के बाद कुछ मरीजों को दवा देकर भेज दिया गया और कुछ को रेफर करना पड़ा.
142 मरीजों का इलाज का जारी
रविवार दोपहर तक जहां 16 मौतों का आंकड़ा था. रविवार दोपहर 1 बजे के करीब शिव विहार कॉलोनी धार के रहने वाले रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा की मौत हो गई. वहीं बॉम्बे हॉस्पिटल में 11 मरीज आईसीयू में भर्ती थे, जिनमें से चार मरीजों को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. अलग-अलग अस्पतालों में 142 मरीजों का इलाज जारी है.
2354 घरों का सर्वे किया
वहीं 4 जनवरी को स्वास्थ विभाग ने 2354 घरों का सर्वे किया. इस दौरान 9416 लोगों की जांच की गई, जिसमें 20 नए मरीज मिले. CMHO डॉ. माधव हसनी ने बताया कि क्षेत्र में 5 एम्बुलेंस भी तैनात की गई है. प्रभावित क्षेत्र के हर घर में 10 ओआरएस पैकेट और 30 जिंक की गोलियां बांटी गई. 17 टीमें लगातार लोगों को जागरूक करने में लगी है.
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मामले पर राजनीति तेज
इंदौर में दूषित पानी से मौतों को लेकर प्रदेश में राजनीति भी बढ़ती जा रही है. प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मोहन सरकार को घेरा है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि 15 दिन बीत गए, लेकिन इंदौर का तथाकथित स्मार्ट प्रशासन और सरकार अब तक दूषित पानी की लीकेज तक नहीं ढूंढ पाई. यानी इंदौर के लोग आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं? 35 से अधिक पानी के सैंपल में गंदा पानी मिला है.
“लोगों की जान के साथ खिलवाड़ जारी“
उन्होंने आगे लिखा कि आखिर ट्रिपल इंजन की सरकार इतने वर्षों से कर क्या रही थी? आज इंदौर में लोगों की जान के साथ खिलवाड़ जारी है और 16 मौतों के जिम्मेदार लोग कुर्सियों पर अहंकार के साथ जमे बैठे हैं, क्योंकि मोहन सरकार ने दोषी मंत्री और महापौर पर कार्रवाई करने के बजाय विपक्ष के नेताओं को जेल में डालना ज्यादा जरूरी समझा.
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