India UNSC Permanent Membership: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहे भारत ने वीटो पावर को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. भारत ने साफ कहा है कि वीटो अधिकार के बिना सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता स्वीकार नहीं की जाएगी. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि बिना वीटो पावर के स्थायी सदस्यता देना किसी देश को दूसरे दर्जे का सदस्य बनाने जैसा होगा.
सभी स्थायी सदस्यों को मिले समान अधिकार
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर-सरकारी वार्ता की पूर्ण बैठक के दौरान राजदूत पर्वथनेनी ने कहा कि जब तक सुरक्षा परिषद में वीटो का प्रावधान मौजूद है, तब तक सुधार के बाद बनने वाली परिषद के सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि निष्पक्षता और न्याय के लिए सभी स्थायी सदस्यों के अधिकार और जिम्मेदारियां समान होनी चाहिए. भारत ने बिना वीटो अधिकार वाले दीर्घकालिक सदस्यों की नई श्रेणी बनाने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई. भारतीय राजदूत के मुताबिक, ऐसी व्यवस्था से मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों की निर्णय लेने की शक्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि असमानता और बढ़ेगी.
1965 के विस्तार का दिया उदाहरण
राजदूत पर्वथनेनी ने वर्ष 1965 में सुरक्षा परिषद के विस्तार का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय अस्थायी सदस्यों की संख्या छह से बढ़ाकर दस कर दी गई थी, लेकिन स्थायी सदस्यों की संख्या पांच ही रही. इससे परिषद में प्रतिनिधित्व तो बढ़ा, लेकिन वीटो अधिकार वाले देशों का विशेषाधिकार बरकरार रहा. भारत ने सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों की मांग करते हुए कहा कि सदस्यता की श्रेणियों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, परिषद के आकार और कार्यप्रणाली पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए. इसके लिए निश्चित समय-सीमा के भीतर लिखित प्रस्तावों पर आधारित बातचीत शुरू करने की जरूरत है.
2028-29 की अस्थायी सदस्यता पर भी भारत की नजर
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का दावेदार रहा है. 1945 में बनी सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना आज की वैश्विक परिस्थितियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती. इसके साथ ही भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता हासिल करने की तैयारी में भी है. एशिया-प्रशांत समूह की सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होने की संभावना है.
क्या है वीटो पावर?
सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों-अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस को वीटो का विशेष अधिकार प्राप्त है. इसके जरिए कोई भी स्थायी सदस्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोक सकता है, भले ही अन्य 14 सदस्य उसका समर्थन करें. भारत का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा परिषद में सुधार केवल सदस्यों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि निर्णय लेने की शक्ति में भी समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए.
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