BJP UP Plan : भारतीय जनता पार्टी की यह खासियत है कि जिस राज्य में चुनाव होने होते हैं वहां महीनों पहले से संगठन को मजबूत करने, उस राज्य के नाराज नेताओं को मनाने और चुनाव कैसे जीता जाए इस पर रणनीति बनानी शुरु कर देती है। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन अभी से बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक लगाने की तैयारी शुरु कर दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने उत्तर प्रदेश की चुनावी कमान संभाल ली है। दोनों दिग्गज नेता प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वे भाजपा के पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों और असंतुष्ट या किनारे चल रहे वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरे में ताबड़तोड़ बैठकें कर सियासी नब्ज टटोल रहे हैं।
2027 में सत्ता की हैट्रिक का मास्टरप्लान
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए केवल मौजूदा विधायकों या मंत्रियों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता. बीजेपी के पुराने कैडर और पूर्व नेताओं के पास अपने-अपने क्षेत्रों में आज भी मजबूत व्यक्तिगत जनाधार है. इसलिए बीजेपी नेतृत्व संवाद के जरिए सियासी समीकरण को दुरुस्त करने में जुट गया है। नितिन नवीन हों या विनोद तावड़े, इनका यह दौरा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भाजपा 2027 की जंग में किसी भी तरह की ढिलाई या अंदरूनी असंतोष को आड़े नहीं आने देना चाहती। पार्टी अब सीधे संवाद के जरिए हर क्षेत्र की राजनीतिक तासीर को भांपकर अपनी रणनीति को धार दे रही है।
लोकसभा चुनाव के नुकसान की भरपाई
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों से सबक लेते हुए बीजेपी का यह ऑपरेशन डैमेज कंट्रोल 2027 विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. मेरठ से लेकर सहारनपुर तक पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर नितिन नवीन पश्चिमी यूपी के सियासी किले को दुरुस्त करने का दांव चल रहे हैं।
बीजेपी के दुर्ग को दुरुस्त करने में जुटी टॉप लीडरशिप
भाजपा के महासचिव विनोद तावड़े ने अवध, पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे अलग-अलग अंचलों का रुख किया है, तो नितिन नवीन पश्चिमी यूपी को साधते नजर आए। कानपुर-बुंदेलखंड के मिजाज को बीजेपी संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष और विनोद तावड़े ने बैठकों का यह दौर केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए सीधे जमीनी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की नब्ज टटोली जा रही है।
गुटबाजी और नाराजगी को दूर करने का बीजेपी प्लान
जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी जिस तरह अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मॉडल और युवाओं को साधने व बीजेपी के अंदरूनी असंतोष को भुनाने में लगी है, उसका मुकाबला करने के लिए भाजपा अपने पुराने और अनुभवी चेहरों को फिर से एक्टिव कर रही है। बीजेपी की टॉप लीडरशिप जिलाध्यक्षों, मौजूदा विधायकों और पूर्व नेताओं के बीच जारी अंदरूनी खींचतान को दूर करने के लिए संवाद कर रही है।
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