Bhojshala Mandir Verdict: मध्य प्रदेश के धार भोजशाला मामले में आज शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने माना है कि धार भोजशाला एक मंदिर परिसर है. कोर्ट ने हिंदू पक्ष की मांग पर दायर याचिका पर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है. कई साल पुराने इस विवाद में 5 याचिकाओं और 3 इंटरवेंशन पर सुनवाई पूरी होनेके बाद दो जजों की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.
“हमने पुख्ता इंतजाम किए हैं”
एमपी हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर इंदौर और धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं. शुक्रवार होने की वजह से संवेदनशीलता और बढ़ गई है. क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज के लोग भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा करते हैं. प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है. हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले इंदौर ग्रामीण के DIG मनोज कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि भोजशाला का फैसला एक संवेदनशील मुद्दा है. कहीं कानून व्यवस्था की कोई गड़बड़ न हो उसके लिए हमने पुख्ता इंतजाम किए हैं. प्रदेश के बाहर से काफी मात्रा में बल आया है. हाई कोर्ट का आदेश सर्वमान्य होगा. कोर्ट के फैसले का पालन कराना हमारी प्राथमिकता है.
“शहर में 9 लेयर की सिक्योरिटी लगाई गई”
धार SP सचिन शर्मा ने भी जिले के सभी निवासियों से अपील करते हुए कहा कि शांति और आपसी भाईचारा बनाकर रखें. कोर्ट के निर्णय का आदर और पालन करें. यदि कोई व्यक्ति विघ्न डालने की कोशिश करता है तो उस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. शहर में 9 लेयर की सिक्योरिटी लगाई गई है. फोर्स पर्याप्त है.
2022 में दायर की गई थी याचिका
बता दें कि साल 2022 में रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला को धार्मिक स्वरूर तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार देने की मांग की गई थी. इसके बाद साल 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया था. इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर निर्बोध पूजा-अर्चना की अनुमति दी. हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई चल रही है जो 12 मई तक चली.
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