Devkinandan Thakur: मशहूर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का एक बयान सुर्खियों में है. दरअसल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में तिलक लगाकर आने वाले छात्रों से कथित तौर पर दुर्व्यवहार और कैंपस से निकालने की शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने एएमयू परिसर में मंदिर बनाने की मांग उठी दी. जिससे प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. कथावाचक के बयान पर विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक ध्रवीकरण पैदा करने के लिए ऐसा बयान दिया जा रहा है. समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इसे विश्वविद्यालय की गरिमा और संवैधानिक ढांचे पर हमला करार दिया है.
देवकीनंदन ठाकुर ने क्या कुछ बोला?
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वह कह रहे हैं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अगर मस्जिद है तो वहां मंदिर भी बनना चाहिए. देवकीनंदन ठाकुर खुर्जा में जंक्शन मार्ग स्थित शारदा जैन अतिथि भवन में रविवार को प्रवचन कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि आपके बच्चों के सिर पर शिखा नहीं है. हाथों में कलावा नहीं है. माथे पर तिलक नहीं है. कथावाचक ने एक श्रद्धालु की तरफ इशारा करते हुए कहा कि कथा में बैठे हो लेकिन तिलक लगाकर नहीं बैठे हैं. तिलक के नाम पर एक बात याद आई तुम्हारे जिले के बगल की बात है अलीगढ़ में एक यूनिवर्सिटी है.
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“तुम गारंटी लो कि टोपी नहीं पहनोगे“
इसके बाद लोगों ने बोला एएमयू, जिसपर देवकीनंदन ठाकुर कहते हैं नाम सुना है, हमें पता नहीं है. वहां एक सनातनी को काम पड़ गया. वह तिलक लगाकर जाने पर उसे वहां रोक दिया. फिर वो कहते हैं अगर तुम्हारी यूनिवर्सिटी का कोई नियम है तो ईमानदारी से हम तिलक नहीं लगाएंगे, लेकिन तुम गारंटी लो कि टोपी नहीं पहनोगे. भारत धर्मनिरपेक्ष देश है. अगर मेरे माथे पर तिलक नहीं तो तेरे सिर पर टोपी नहीं. अगर मैं रामायण नहीं पढ़ सकता तो तुम कुरान नहीं पढ़ोगे. यूनिवर्सिटी चलती किसके पैसे से है, सरकार के पैसे से चलती है. इसलिए हम कह रहे हैं कि अगर वहां मस्जिद भी बनना चाहिए. अगर वहां टोपी है तो वहां तिलक भी लगना चाहिए. क्योंकि यह भारत मेरे राम का है और कृष्ण का है.
कथावाचक के बयान पर क्या बोली बीजेपी?
बीजेपी ने कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के बयान से किनारा कर लिया है. बीजेपी नेताओं ने कहा कि देवकीनंदन ठाकुर के निजी विचार हो सकते है, पार्टी या सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया किसी भी संस्थान में नियमों का पालन होना चाहिए, लेकिन मंदिर निर्माण जैसे भावनात्मक मुद्दों पर फिलहाल कोई अधिकारिक टिप्पणी नहीं करना चाहते.



