Bharati-Nari Se Narayani: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता विज्ञान भवन में महिला विचारकों के राष्ट्रीय सम्मेलन “भारती-नारी से नारायणी” में शामिल हुईं. उन्होंने कहा कि जो दो दिवसीय यहां पर राष्ट्रीय विचारों का प्रवाह होने वाला है, शानदार है, नारी से नारायणी और हमारे देश ने इस बात का अपने आप में एक बड़ा प्रचलन है. इतिहास से, हमारी संस्कृति से, वेदों से कि महिला को जिस स्वरूप में पूजा जाता है, माना जाता है वो अपने आप में महान है, देवी स्वरूपा मानकर सदैव नारी शक्ति की आराधना हमारे देश में की जाती है. मैं आज भी याद करती हूं वो दिन कि जब मैं कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए निकली तो मेरे पिताजी ने कहा कि ये लो फीस के पैसे, कॉलेज जाओ पर गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन लेना और मैं यूनिवर्सिटी पहुंच गई अपनी सहेलियों के साथ और एडमिशन लेने के लिए तो मैंने देखा कि एक मिरांडा कॉलेज है, कैम्पस में और एक दौलतराम कॉलेज है. तो हमने दौलतराम में एडमिशन ले लिया, अब वहां पर पहुंच के कॉलेज की स्टूडेंट्स के बीच में रहते वे कुछ-कुछ स्टूडेंट्स प्रॉब्लम्स के लिए काम करने का उत्साह हुआ, लग गए, संगठन से जुड़े, विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए.
“महिलाएं केवल परंपरा की वाहक नहीं”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ये लंबी यात्रा रही कहीं न कहीं भारत की नारी की. इस लंबी यात्रा में न जाने कितने समाज सुधारकों ने अपनी भूमिका निभाई कितने संगठनों ने अपनी भूमिका निभाई और कितनी सरकारों ने अपनी भूमिका निभाई. ये भी कहा कि महिलाएं केवल परंपरा की वाहक नहीं हैं, परिवर्तन की भी वाहक हैं. वो परिवर्तन, आज मैं यहां इस हॉल में आप सबके माध्यम से देख पा रही हूं. इस हॉल में मैंने अनेकों कार्यक्रम अटेंड किए हैं, अधिकांश पुरुषों के होते हैं और मैं देखती हूं कि वो ग्रे, ब्लैक, ब्लू कोट, पैंट और शर्ट में यह हॉल कैसा दिखता है और आज कैसा दिख रहा है? यह बात तो पक्की है कि महिलाएं जहां भी होती हैं पूरा माहौल वाइब्रेंट हो जाता है. उनकी ऊर्जा, उनकी शख़्सियत, हर माहौल में, हर समाज में एक रंग-सा भर देती है और वो रंग उनके अपने बनाए हैं.
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“मां अपनी बेटी के लिए अवसर के रास्ते खोल देगी”
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि जब कोई मुझे कहता है कि देश की या दिल्ली की महिलाओं के लिए आपका क्या सन्देश है? तो, मैं कहती हूं देश और दिल्ली की महिलाओं के लिए नहीं, लेकिन सभी मां के लिए मेरा सन्देश है कि जो चीज आपको नहीं मिली, जो मौका, जो अवसर, जो अधिकार वो अपनी बेटी को जरूर आप देना, वो अपने निर्णय करने की आजादी, वो आगे बढ़ने के मौके, वो खुला आसमान आप अपनी बेटी को जरूर देना, इतना मेरा आपसे निवेदन है. क्योंकि जब हर मां अपनी बेटी के लिए अवसर के रास्ते खोल देगी तो ये समाज अपनी ऊंचाइयां अपने आप ले लेगा.
“दिल्ली में महिला अपनी मर्जी से नौकरी कर सकती है”
उन्होंने कहा कि दिल्ली की बहनों को सुरक्षा मिले, अच्छा माहौल मिले. मैं एक दिन व्यवसाय से जुड़े कुछ नियम पढ़ रही थी, तो मैंने देखा कि उसमें तो महिलाओं को रात में काम करने की इजाज़त नहीं थी. मैं हैरान रह गई, ऐसा भी होता है? अगर कोई बहन काम करना चाहती है, उसके लिए ऑप्शन है, ऑपर्च्युनिटी है, तो सरकार उसको मना करने वाली आजकल के जमाने में कौन है. तुरंत मैंने उस नियम को वहां से खत्म किया और आज दिल्ली में महिला अपनी मर्जी से सुरक्षा नियमों के साथ, रात में भी अपनी नौकरी, अपना काम कर सकती है.



