Street Namaz Ban: उत्तर प्रदेश में बकरीद से एक हफ्ते पहले सड़कों पर नमाज को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सख्त चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि सड़कों पर नमाज कतई नहीं होने दी जाएगी क्योंकि सड़कें आम नागरिकों, बीमारों और व्यापारियों के आवागमन के लिए हैं. उन्होंने कहा कि कानून का राज सबके लिए समान है, इसलिए यदि संख्या अधिक है तो लोग शिफ्ट में या अपने तय धार्मिक स्थलों पर नमाज पढ़ें. मुख्यमंत्री के नमाज को लेकर दिए गए बयान पर सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि दोरंगी छोड़, एक रंग होजा, सरासर मोम या फिर संग हो जा. सीएम योगी जी, जो भी नियम लाएं, सोच समझकर लाएं. हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों के लिए एक समान नीति होनी चाहिए. अगर सड़क पर नमाज पर प्रतिबंध लगाना है तो फिर दूसरे धर्मों के जितने भी धार्मिक आयोजन सड़क पर होते हैं, उन सभी पर भी समान रूप से प्रतिबंध लगना चाहिए, तभी इसे निष्पक्ष माना जाएगा.
“आप इस देश के कानून को नहीं मानते हैं”
कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि लेकिन जब आप धर्म विशेष को टारगेट करने के लिए प्रतिबंध लगाने की बात करते हैं तो इससे स्पष्ट होता है कि आप ये प्रतिबंध जनता के सुख के लिए नहीं बल्कि अपने राजनीतिक उद्देश्यों और सांप्रदायिकता, सांप्रदायिकता का जहर बढ़ाने के लिए, मंदिर-मस्जिद विवाद कराने के लिए, हिंदू-मुसलमान का विवाद कराने के लिए लगाते हैं जो कि सर्वथा कानून और विधि के खिलाफ है. आप इस देश के कानून को नहीं मानते हैं. अगर आपके अंदर हिम्मत है तो सभी पर समान रूप से प्रतिबंध लगाइये. वरना माना जाएगा आप ये प्रतिबंध राजनीतिक रोटियां-सेकने और सांप्रदायिकता को बढ़ाने के लिए लगा रहे हैं.
“मंदिरों में सुबह-सुबह घंटियां बजती हैं”
महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता हुसैन दलवाई ने कहा कि सड़क पर नमाज़ पढ़ना मुझे भी पसंद नहीं है. मस्जिदों में एक से ज्यादा जमातें कराई जा सकती हैं. लेकिन मैं सीएम योगी से पूछना चाहता हूं कि हमारे देश में कई धार्मिक त्योहार और आयोजन भी सड़कों पर होते हैं. मुंबई में गणपति उत्सव सड़कों पर मनाया जाता है. मंदिरों में सुबह-सुबह घंटियां बजती हैं. अगर अज़ान की आवाज़ को लेकर कोई सुझाव है कि आवाज़ कम होनी चाहिए, तो उस पर बात हो सकती है. लेकिन हर मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से देखना ठीक नहीं है.
“इस्लाम नहीं कहता कि चौराहों या पार्कों में नमाज़ पढ़ी जाए”
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा कि नमाज़ के लिए एक जगह मुकर्रर है और उस जगह को मस्जिद कहा जाता है. इसके अलावा इस्लाम में यह भी कहा गया है कि अगर आप घर में हैं तो वहां भी नमाज़ पढ़ सकते हैं, दुकान में हैं तो वहां भी नमाज़ पढ़ सकते हैं. नमाज़ पढ़ने के लिए सुकून और इत्मिनान जरूरी है, ताकि खुदा और बंदे के बीच कोई चीज़ बाधा न बने. यह सुकून मस्जिद या घर में बेहतर तरीके से मिल सकता है. इसलिए मस्जिद में नमाज़ पढ़ने का ज्यादा सवाब माना गया है. इस्लाम यह नहीं कहता कि चौराहों या पार्कों में नमाज़ पढ़ी जाए. शरियत में यह व्यवस्था भी है कि ईद और बकरीद जैसे मौकों पर, जब नमाज़ियों की संख्या ज्यादा हो जाती है, तो एक ही मस्जिद में अलग-अलग जमातें कराई जा सकती हैं. इससे सड़क पर ट्रैफिक प्रभावित नहीं होगा, जाम नहीं लगेगा और किसी को परेशानी भी नहीं होगी.
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