Supriya Shrinate: कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर बीजेपी पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि मंदिर तोड़े जा रहे हैं, शिवलिंग ध्वस्त किए जा रहे हैं, मूर्तियां खंडित की जा रही हैं, शंकराचार्य को रोका जा रहा है, साधु संतों को पटक पटककर पीटा जा रहा है, रामायण, महाभारत को किससे कहानी बताया जा रहा है, पवनसुत हनुमान जी को पतंग बनाकर उड़ाया जा रहा है. ये सब बांग्लादेश में नहीं यहीं हिंदुस्तान में हो रहा है. हिंदू वाक़ई खतरे में है, ढोंगी BJP वालों से.
बता दें कि काशी के मणिकर्णिका घाट पर इन दिनों बड़े स्तर पर कायाकल्प का काम चल रहा है. इसी को लेकर तोड़फोड़, मूर्तियों के नुकसान और धार्मिक विरासत के विध्वंस के आरोपों ने सियासी घमासान खड़ा कर दिया है. दूसरी तरफ बीते रविवार को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या के दिन संगम तट पर स्नान से वंचित रहने का मामला भी गरमाया हुआ है. उनके समर्थकों में रोष बना हुआ है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौन उपवास पर बैठे हैं. जिसको लेकर भी मामला गरमाया हुआ है. इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने बीजेपी को घेरा है.
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत पर भी घेरा
ग्रेटर नोएडा में नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर की घोर लापहरवाही से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान ले ली. घटना को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि पापा मैं डूब रहा हूं, मुझे आकर बचा लो. घना कोहरा था, इस बीच 27 साल के युवराज मेहता की कार नोएडा के पॉश इलाके में पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी. ये गड्ढा एक बिल्डर ने खुदवाया था, जिसमें बारिश का पानी भर गया. युवराज ने हिम्मत जुटाई और गाड़ी की छत पर पहुंच गया, अपने पिता को कॉल करके बचाने की गुहार लगाई. पिता ने यूपी पुलिस को सूचना दी. मौके पर यूपी पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF की टीम पहुंची. 2 घंटे तक इन सरकारी विभागों के 80 लोग वहां मौजूद रहे, लेकिन ‘पानी ठंडा’ होने की वजह से कोई पानी में नहीं उतरा. फायर ब्रिगेड और SDRF की टीम के पास कोई उपकरण नहीं थे, जिससे युवराज को बचाया जा सके.
“इस बेकार, नकारा सिस्टम ने की है”
उन्होंने आगे कहा कि 2 घंटे तक युवराज अपनी जान बचाने की गुहार लगाते रहा और आखिर में डूबने से उसकी मौत हो गई. यूपी पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF की टीम वहां खड़ी तमाशा देखती रही. लाचार पिता सबसे गुहार लगाते रहे, और अपने सामने ही जवान बेटे को तिल तिल मौत के करीब जाते देखते रहे. ये है हमारा आपदा प्रबंधन का सिस्टम, जो बड़े शहरों में भी काम नहीं कर पा रहा है. गांव, कस्बों की तो बात हो छोड़ दीजिए, युवराज की मौत हत्या है, जो इस बेकार, नकारा सिस्टम ने की है.



