Nandigram : कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव से पहले नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को जमानत दे दी। जमानत मिलने से कांग्रेस उम्मीदवार को सबसे बडा फायदा यह हुआ है कि अब वो प्रचार कर सकेंगे। जेल में रहते उनका प्रचार नहीं हो सकता था। गुरुवार को अदालत ने फैसले में कहा कि पुलिस इस मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती। कोर्ट ने मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने की भी इजाजत दे दी है।
शिकायत 2007 में जांच अधिकारी ने 19 साल बाद कार्रवाई की
कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने मिलन को जमानत देते हुए टिप्पणी की- यह आश्चर्यजनक है कि शिकायत 2007 में दर्ज की गई थी और जांच अधिकारी ने 19 साल बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की है। जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई डॉक्यूटमेंट पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि कोई प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया था। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूर्व मेदिनीपुर जिले के खेजुरी पुलिस थाने में दर्ज साल 2007 के इस केस के सिलसिले में 12 अक्टूबर तक प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई न करे। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
अब चुनाव प्रचार भी कर सकेंगे
हल्दिया सब-डिविजनल कोर्ट ने उन्हें 19 सितंबर को 4 मामलों में 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। ये मामले 2007 के नंदीग्राम से जुड़े हैं। इसके बाद 21 सितंबर को कांथी कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के करीब दो दशक पुराने मामले में उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। दोनों निचली अदालतों के आदेशों से प्रधान के लिए खुद प्रचार करने का मौका लगभग खत्म हो गया था। लेकिन हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद वे चुनाव प्रचार भी कर सकेंगे।
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