Haryana Mysterious Disease: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद हरियाणा के पलवल जिले के छांयसा गांव में भी संक्रमित पानी से कई लोगों की जान चली गई है. पिछले दो हफ्तों में यहां 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. गांव के लोग इन दिनों डर और चिंता के माहौल में जी रहे हैं. कांग्रेस ने मौतों के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदारी ठहराया है. कांग्रेस नेत्री कुमारी शैलजा ने छांयसा गांव में गंदे पानी से हुई मौतों पर कहा कि सदन में खड़े होकर ये(भाजपा) लोग बड़े-बड़े नारे लगाते हैं कि ‘हर घर जल’ लेकिन हर जगह हालात ऐसे हैं, चाहें इंदौर की बात हो या हरियाणा में कई जगहों पर पीने का पानी प्रदूषित हो रहा है. पलवल में भी कितने लोगों की जान गई है. सरकार कर क्या रही है? आम नागरिक का जीवन खतरे में है.
कुमारी शैलजा ने आगे कहा कि सरकार इस तरह के खतरों की बात क्यों नहीं करती? भाजपा की सरकार बताए, डबल इंजन की सरकार बताए कि क्यों उनकी लापरवाही से लोगों की जानें जा रही हैं. ‘हर घर जल’ कहां गया वो जल क्या हमारे लोगों को प्रदूषित जल ही मिलना है, जिससे लोगों की जान जाए. सरकार इस बात का जवाब दे.
“नल में ज़हर, सत्ता बेअसर”
इससे पहले कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मंगलवार को एक्स पर पोस्ट कर लिखा था कि नल में ज़हर, सत्ता बेअसर, पानी में कहर, सरकार बेख़बर. अमृत का दावा, हकीकत में ज़हर का असर. हरियाणा के पलवल के छायंसा गांव में सिर्फ 15 दिनों में 15 मौतें, जिनमें 6 मासूम बच्चे भी शामिल. क्या ये है ‘अमृत काल’ या ‘मृत्यु जाल’. 107 पानी के सैंपल लिए गए, 23 फेल. कई नमूनों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, यानी मल-मूत्र से दूषित पानी. क्लोरीनेशन ही नहीं हुआ, बिना शुद्धिकरण के पानी लोगों के घरों तक पहुंचा. हकीकत ये है कि 1,500 लोगों की स्क्रीनिंग, 800 ओपीडी जांच, 210 ब्लड सैंपल, सामने आए हेपेटाइटिस B और C के मामले, गांव में लोग बुखार, पीलिया, उल्टी और पेट दर्द से जूझते रहे और प्रशासन सोता रहा.
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“हरियाणा की जनता हिसाब मांग रही है”
सुरजेवाला ने आगे लिखा कि सवाल गूंज रहा है, अगर पानी ही ज़हर बन जाए तो जीवन कैसे बचेगा? क्या गरीबों और किसानों की बस्ती में रहने वालों की जान सस्ती है? किसकी लापरवाही से 12 घरों के चिराग बुझ गए? ये सिर्फ बीमारी नहीं, ये बदइंतज़ामी की पराकाष्ठा है. ये जल-जनित जनसंहार है. हरियाणा की जनता हिसाब मांग रही है साफ पानी दो, जिम्मेदारों पर FIR करो, दोषियों को सज़ा दो. इसके साथ ही सुरजेवाला ने सवाल खड़े किए कि पानी गंदा क्यों था? व्यवस्था अंधी क्यों थी? और सत्ता चुप क्यों है?



