UP Politics: यूपी में विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है. दूसरी तरफ ब्राह्मण विधायकों का कुटुम्ब तैयार होने से सियासी सरगर्मियां तेज हो गई है. शीतकालीन सत्र (Up Assembly Winter Session) के तीसरे दिन बीजेपी और अन्य दलों के 52 ब्राह्मण विधायक और विधान परिषद सदस्य एक जगह जुटे और बंद कमरे में बैठे. कुशीनगर के विधायक पंचानंद पाठक के आवास पर इन ब्राह्मण विधायकों और एमएलसी का जुटान हुआ. जिसे सहभोज नाम दिया गया. इसमें खासतौर पर बुंदेलखंड और पूर्वांचल के विधायक पहुंचे थे. हालांकि विधायकों का कहना है कि यह सहभोज था कोई बैठक नहीं.
सहभोज में शामिल हुए 4 दर्जन ब्राह्मण विधायक
मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट से विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कहा कि विधायक पंचानंद पाठक में आयोजन में 4 दर्जन ब्राह्मण विधायक शामिल हुए. साथ ही उन्होंने दावा किया कि इसमें कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. हम सबने वहां खाना खाया और वहां से सभी चले गए. विधायक रत्नाकर मिश्रा के अलावा सहभोज में विधायक शलभमणि त्रिपाठी, एमएलसी उमेश द्विवेदी भी मौजूद रहे. ये सभी सीएम योगी (Up Assembly Winter Session) के करीबी माने जाते हैं. उनके अलावा बैठक में तरबगंज से विधायक प्रेमनारायण पांडेय, नौतनवां विधायक ऋषि त्रिपाठी, एमएलसी साकेत मिश्रा, एमएलसी उमेश द्विवेदी, बाबूलाल तिवारी और धर्मेंद्र सिंह, बांदा विधायक प्रकाश द्विवेदी, बदलापुर से भाजपा विधायक रमेश मिश्रा, खलीलाबाद से विधायक अंकुर राज तिवारी, मेहनौन से बीजेपी विधायक विनय द्विवेदी सहित अन्य विधायक बैठक में शामिल हुए.
यूपी में हैं 52 ब्राह्मण विधायक
बता दें कि यूपी विधानसभा (Up Assembly Winter Session) में इस समय 52 ब्राह्मण विधायक हैं, जिसमें से 46 बीजेपी के हैं. ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने बीजेपी और योगी सरकार की चुनौती बढ़ा दी है. गौरतलब है कि पिछले मानसून सत्र के दौरान भी एक ऐसा ही आयोजन चर्चा का केंद्र बना था. ठाकुर विधायकों के जुटान को कुटुंब नाम दिया गया था. इस कार्यक्रम में बीजेपी के ठाकुर विधायकों के अलावा अन्य दलों के ठाकुर विधायक पहुंचे थे. इस आयोजन को विधायकों ने पारिवारिक मिलन बताया था.
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ब्राह्मणों की बीजेपी से नाराजगी बढ़ी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी में ब्राह्मणों की बीजेपी से नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है. ब्राह्मण समाज बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक रहा है. बीजेपी जब यूपी में तीसरे नंबर की पार्टी थी तब भी समाज का अधिकांश वोट बीजेपी को ही मिलता था. लेकिन पिछले कुछ सालों से ब्राह्मण समाज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है.



