Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. मीडिया रिपोट्स की मानें तो एसआईटी ने आशंका जताई है कि राम मंदिर से चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषणों को गलाकर उनकी पहचान मिटाने की कोशिश की गई है. चोरी से जुड़े आभूषण बरामद नहीं होने से जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा गया है. जिसके बाद आभूषणों के रिकॉर्ड, उनके रखरखाव और बहुमूल्य धातुओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी की जा रही है.
SIT अधिकारियों ने रामलला के दर्शन करने के बाद प्रभारी केडी बाबू से मंदिर में रखे आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं की विस्तृत जानकारी ली है. जांच टीम ने आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं से जुड़े अभिलेख, रिकॉर्ड तथा सरकार के उपक्रम मिंट के साथ हुए लेन-देन का पूरा विवरण भी मांगा है. जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में भी जुटी है कि कहीं कथित तौर पर सोने-चांदी के आभूषणों को गलवाकर उनकी पहचान तो खत्म नहीं कर दी गई है. सूत्रों के मुताबिक,SIT को कार्रवाई के दौरान आभूषण बरामद नहीं हुए हैं. जिसके चलते यह एंगल भी जांच में शामिल किया गया है.
आपस में बांटी जाती थी चोरी की रकम
वहीं दूसरी तरफ पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ में कई ऐसी बातें सामने आई है. जो इस अहम नेटवर्क को समझने के लिए महत्वपूर्ण है. अविनाश ने माना कि चढ़ावे से निकाली गई रकम आरोपियों के बीच बांटी जाती थी. चोरी के सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने की कोशिश होती थी. 13 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड के बाद अविनाश शुक्ला को जेल भेज दिया गया है. सूत्रों की मानें तो पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान अविनाश शुक्ला को करीब 45 दिनों की सीसीटीवी फुटेज दिखाई. जिसे देखने के बाद अविनाश टूट गया और उसने अपने चोरी की भूमिका को स्वीकार कर लिया. पूछताछ में उसने माना कि वो चढ़ावे की रकम में हेराफेरी करता था और वो इस काम में अकेला शामिल नहीं था. बल्कि चोरी के बाद सभी आरोपी आपस में रकम का बंटवारा करते थे. इस पूरे नेटवर्क में टित्रू यादव दबदबा था. उसकी बात अंतिम मानी जाती थी, पूरी योजना में उसकी अहम भूमिका थी.
अविनाश के मुताबिक, टित्रू यादव कहता था कि सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए जाएंगे, कुछ नहीं होगा.
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