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अमेरिका की ईरान पर हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला करने की योजना, टारगेट पर बचे हुए ईरानी नेता

America and Iran president

America : अमेरिका ईरान पर हाईपरसोनिक मिसाइलों से हमले करने की योजना बना रहा है। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि अब अमेरिका के निशाने पर ईरान के बचे हुए नेता और सैन्य ताकत हैं। अमेरिका के इस प्लान को ध्यान में रखते हुए अब ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता अब ठंडी पडती नजर आ रही है. दोनों ओर तीखी बयानबाजी और युद्व की धमकियों से लगता है कि ईरान के साथ साथ अब अमेरिका भी वार्ता करने का इच्छुक नहीं है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब अमेरिका पहली बार ईरान के खिलाफ हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है।

सेंट्रल कमांड के कमांडर का Plan 

अमेरिका की सेंट्रल कमांड के कमांडर ने राष्ट्रपति ट्रम्प को ईरान के खिलाफ संभावित हमला करने के विकल्पों की जानकारी दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एडमिरल ब्रैड कूपर ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ट्रम्प के साथ बैठक में ये विकल्प पेश किए। इसमें बताया गया कि अगर ट्रम्प दोबारा हमले का फैसला लेते हैं, तो एक ‘छोटा लेकिन बहुत ताकतवर हमला’ किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में ईरान की बची हुई सैन्य ताकत, उसके नेता और अहम ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को निशाना बनाया जा सकता है।

नए हथियारों का इस्तेमाल

रक्षा मंत्रालय कुछ नए और एडवांस हथियार इस्तेमाल करने पर भी विचार कर रहा है। इनमें ‘डार्क ईगल’ नाम की हाइपरसोनिक मिसाइल भी शामिल है। यह मिसाइल करीब 2,000 मील (करीब 3,200 किलोमीटर) दूर तक निशाना साध सकती है और ईरान के बचे हुए बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को टारगेट कर सकती है। इसके अलावा, बी-13 लांसर बॉम्बर विमानों की मौजूदगी भी इलाके में बढ़ाई जा रही है। ये विमान भारी मात्रा में हथियार ले जाने में सक्षम हैं और हाइपरसोनिक हथियार भी ले जा सकते हैं।

संभवित युद्व का असर

ईरान की धमकी -सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने कहा, हम हमलावरों को समंदर में डुबो देंगे। फारस की खाड़ी में उनके लिए कोई जगह नहीं है। तेल की कीमत बढ़ी-गुरुवार को कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़कर करीब 126 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई। यह 4 साल में सबसे ज्यादा थी। बाद में यह कम होकर 115 के करीब पहुंची। मुजतबा की सेहत पर सस्पेंस- मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अब भी साफ जानकारी सामने नहीं आई है। वह अभी तक कभी सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं। अमेरिकी एयरक्राफ्ट लौटा- दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड अब 300 दिनों से ज्यादा की रिकॉर्ड तैनाती के बाद अमेरिका लौट रहा है

यूएन में ईरान ने अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा बताया

अपनी कूटनीतिक रणनीति के तहत ईरान युद्व के मैदान के साथ साथ संयुक्त राष्ट्र में भी अपना पक्ष रखने में सक्रिय है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने छह अरब देशों के एक पत्र का जवाब दिया है। इरावानी ने आरोप लगाया कि इन देशों ने अमेरिका और इजराइल को अपने सैन्य ठिकाने इस्तेमाल करने दिए, जहां से ईरान पर हमले किए गए। उन्होंने कहा कि इस वजह से ये देश भी हमले में शामिल माने जाएंगे। ईरान ने अपनी कार्रवाई को सही बताते हुए कहा कि उसने आत्मरक्षा में जवाब दिया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसका अधिकार है। साथ ही चेतावनी दी कि जो देश हमलों में मदद करेंगे, उन्हें इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इरावानी ने यह भी कहा कि इस संघर्ष की शुरुआत ईरान ने नहीं की, बल्कि वह सिर्फ जवाब दे रहा है। सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान ने हाल ही में यूएन और सुरक्षा परिषद को चिट्ठी भेजी थी। इसमें कहा गया था कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। इन देशों ने खास तौर पर अपील की कि सभी पक्ष संयम बरतें और टकराव को और न बढ़ाएं।

ट्रम्प ने अब स्पेन-इटली से सैनिकों को हटाने की धमकी दी

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे इटली और स्पेन में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटा सकते हैं। उन्होंने ईरान मुद्दे पर दोनों देशों के रुख की आलोचना करते हुए यह संकेत दिया। उन्होंने इटली को मदद न करने वाला बताया, जबकि स्पेन को खराब देश कहा। ट्रम्प एक दिन पहले जर्मनी में भी सैनिकों की संख्या घटाने की बात कर चुके हैं। माना जा रहा है कि इन टिप्पणियों से नाटो के प्रमुख सहयोगी देशों के साथ रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है, खासकर तब जब ईरान युद्ध को लेकर पहले से ही गठबंधन के भीतर मतभेद बने हुए हैं।

संसद में जंग रोकने की मंजूरी वाला प्रस्ताव टला

ट्रम्प ने ईरान युद्ध की मंजूरी के लिए संसद में प्रस्ताव रखने का इरादा अभी टाल दिया है। युद्ध के 60 दिन का समय पूरा होने के बाद इसे जारी रखने के लिए 1 मई को प्रस्ताव रखा जाना था। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को संसद में कहा कि राष्ट्रपति को 60 दिन से ज्यादा युद्ध जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि ईरान के साथ जो सीजफायर (युद्धविराम) हुआ है, उससे यह 60 दिन की समय सीमा रुक गई है। अमेरिका-ईरान जंग 7 अप्रैल को रुक गया था। इसका मतलब है कि यह जंग करीब 40 दिन चला। हेगसेथ ने यह भी कहा कि इस समय सबसे बड़ा खतरा ईरान नहीं, बल्कि युद्ध विरोधी हैं। इनमें कुछ डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन हैं।

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