West Bengal Assembly Election 2026:ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में रविवार को एक सभा के दौरान ऐलान किया है कि AIMIM ने फैसला लिया है कि पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) के साथ AIMIM एक गठबंधन करेगी और हम इस विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेंगे. हमारी कोशिश है कि AIMIM को मजबूत किया जाए, हमारी आवाज़ को मज़बूत किया जाए. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार हैं, वहां 30% मुसलमानों की आबादी है, वहां लगभग 5 लाख पिछड़े वर्ग के प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया जिसमें मुसलमान भी शामिल हैं. ये लोग धर्मनिरपेक्षता के नाम पर वोट हासिल करते हैं लेकिन जहां AIMIM हिस्सेदारी की बात करती है तो इन्हें तकलीफ होती है. इस गठबंधन को लेकर पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है.
सीट शेयरिंग का क्या रहेगा गणित?
ओवैसी की पार्टी AIMIM और हुमायूं कबीर की AJUP में सीट बंटवारे का खाका 25 मार्च को कोलकाता में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेश किया जाएगा. ओवैसी और हुमायूं कबीर एक मंच से अपनी चुनावी योजना का ऐलान करेंगे. जिसपर सबकी नजरें टिकी हुई है. AJUP पहले ही 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर चुकी है और 18 उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर चुकी है. ऐसे में AIMIM लगभग 8 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने वाली है. खास बात है कि हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले की 3 सीटों भगवानगोला, नौदा और राजीनगर से चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं.
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बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम
बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2 चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे और मतगणना 4 मई को होगी. राज्य में 294 सीटें हैं और मुख्य तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच होने की उम्मीद है. अब देखना दिलचस्प होगा कि यह नया समीकरण बंगाल की सियासत में कितना असर डाल पाता है. 2011 की जनसंख्या के अनुसार बंगाल में करीब 27 फीसदी मुस्लिम है, हालांकि अब माना जा रहा है कि मुस्लिम आबादी बढ़कर 30 फीसदी से अधिक हो गई है. बंगाल के सीमावर्ती इलाकों के कई जिले मुस्लिम बहुत हैं. पिछले चुनावों में मुस्लिम समुदाय ने ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन किया है लेकिन अगर AIMIM और AJUP एक साथ आती है तो मुस्लिम वोट बंट जाएंगे और ममता बनर्जी को नुकसान झेलना पड़ सकता है.



