Delhi Assembly Session:नई दिल्ली में जारी विधानसभा बजट सत्र के दौरान सियासी पारा बढ़ता जा रहा है. आम आदमी पार्टी के विधायकों ने सत्र का बहिष्कार किया है. उन्होंने सदन के बाहर आकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की. AAP विधायकों ने लोकतंत्र की अर्थी निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि ‘लोकतंत्र की अर्थी’ सिर्फ़ एक विरोध नहीं, बल्कि इनकी तानाशाही के खिलाफ़ जनता का आक्रोश है. याद रखिए, लोकतंत्र की हत्या करने वालों को इतिहास कभी माफ़ नहीं करता और जनता हर अन्याय का हिसाब लेती है. विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है. दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता और AAP विधायक आतिशी ने धरना देते हुए कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी से अपील करती है कि जिन विधायकों को निष्कासित किया गया है उन्हें दोबारा सदन में आने की अनुमति दी जाए.
“भाजपा लोकतंत्र की हत्या करने पर तुली हुई है”
आतिशी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक आम आदमी पार्टी का कोई भी विधायक विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेगा. उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतंत्र की हत्या करने पर तुली हुई है. विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर होता है और यहां पक्ष और विपक्ष दोनों की आवाज होती है. हम सभी विधायकों को 2-3 लाख लोगों ने चुनकर भेजा है. लेकिन भाजपा ने इसे सत्ता के अहंकार का अड्डा बना दिया है. विपक्ष की आवाज़ को कुचलने के लिए चुने हुए विधायकों को सस्पेंड करते हैं. सड़क पर बैरिकेड्स लगाकर पुलिस के डंडे दिखाते हैं. सच ये है कि बीजेपी जनता के सवालों से भाग रही है.
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“सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे”
आतिशी ने कहा कि सरकार बिजली, पानी, अस्पतालों की बदहाली और हालिया अग्निकांड की पीड़ा से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है. हम दिल्ली की जनता के सवाल सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे. तानाशाही के सामने झुकेंगे नहीं बल्कि लड़ेंगे. भाजपा को कानून व्यवस्था की चिंता नहीं है. भारत के संविधान ने हर इंसान को अपनी आवाज उठाने का अधिकार दिया है. भाजपा क्यों हमारी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है?



