Pakistan attack Afghanistan: माना जाता है कि रमज़ान के पवित्र महीने में हिंसा या युद्व नहीं किया जाता लेकिन इन दिनों जब रमज़ान चल रहे हैं पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक किया है और वो भी तडके के समय। पाकिस्तान की सेना ने रविवार तड़के अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और इस्लामिक स्टेट से जुड़े सात कैंपों और ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान सरकार ने इसे हालिया आत्मघाती हमलों के बाद जवाबी अटैक बताया।
एक ही परिवार के 23 लोग मलबे के नीचे दब गए
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन था। पाकिस्तान ने कहा, ‘हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि हमले अफगानिस्तान की जमीन से चल रहे नेटवर्क ने कराए।’ अफगानिस्तानी मीडिया टोलो न्यूज के मुताबिक हमले में नांगरहार के एक घर को निशाना बनाया, जिससे एक ही परिवार के 23 लोग मलबे के नीचे दब गए। अब तक सिर्फ चार लोगों को निकाला जा सका है। हमले के समय परिवार सो रहा था, इसलिए उन्हें भागने का मौका ही नहीं मिला। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन के मुताबिक इसमें 16 लोगों की मौत हो गई। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, आंकड़ों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अफगानिस्तान बोला- सही समय पर कड़ा जवाब देंगे
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सही समय पर पाकिस्तान को जवाब देने की चेतावनी दी है। मंत्रालय ने इन हमलों को अफगानिस्तान की गोपनीयता नीति का उल्लंघन बताया। अफगान सूत्रों के अनुसार पक्तिका में एक धार्मिक स्कूल पर ड्रोन हमला हुआ और नांगरहार प्रांत में भी कार्रवाई की गई। पाकिस्तान ने कहा है कि उन्होंने आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया, लेकिन अफगान स्रोतों के अनुसार नागरिकों को नुकसान हुआ। पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान सरकार से मांग करता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि ज्ज्च् अफगानिस्तान से संचालित हो रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबान पर दबाव डाले- पाकिस्तान
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह 2020 में दोहा में अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत तालिबान पर दबाव डाले, ताकि अफगान जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ न हो। 2020 का दोहा समझौता जिसे अफगानिस्तान में शांति प्रयास भी कहा जाता है। यह अमेरिका और तालिबान के बीच 29 फरवरी 2020 को कतर की राजधानी दोहा में हस्ताक्षरित हुआ था। यह समझौता अफगानिस्तान में 2001 से चल रहे युद्ध को समाप्त करने और अमेरिकी बलों की वापसी का रास्ता बनाने के लिए किया गया था। तालिबान ने प्रतिबद्धता जताई कि वह अफगानिस्तान की जमीन को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले किसी भी समूह या व्यक्ति को इस्तेमाल नहीं करने देगा। इसमें विशेष रूप से अल-कायदा और अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से संबंध तोड़ने और उन्हें अफगानिस्तान में भर्ती, प्रशिक्षण, फंडिंग या हमले की अनुमति न देने का वादा शामिल था। समझौते के बाद अमेरिका ने 2021 में अपनी सेना वापस बुला ली, जिसके बाद तालिबान ने तेजी से काबुल पर कब्जा कर लिया
पाकिस्तानी शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान ब्लास्ट हुआ था
एयरस्ट्राइक से कुछ घंटे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें दो सैनिक, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी मारे गए। 16 फरवरी को पाकिस्तान के बाजौर में विस्फोटकों से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकरा दी गई थी। इस हमले में 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हुई। अधिकारियों ने हमलावर को अफगान नागरिक बताया था। इससे पहले 6 फरवरी को इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद (इमामबाड़ा) में आत्मघाती हमला हुआ था। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक, हमले में 31 लोगों की मौत हो गई है और 169 घायल हुए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।
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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण
अक्टूबर में हिंसक झड़पों के बाद तनाव बढ़ा, अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों में दोनों तरफ के सैनिकों और नागरिकों की मौत के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। कतर की मध्यस्थता से 19 अक्टूबर को युद्धविराम हुआ था, लेकिन तुर्किये के इस्तांबुल में वार्ता औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकी। दरअसल, 9 अक्टूबर को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (ज्ज्च्) के ठिकानों पर हवाई हमले हुए थे। तालिबान का कहना था कि ये हमले पाकिस्तान ने किए थे। हालांकि पाकिस्तान ने साफ तौर पर ये नहीं कहा कि ये हमले उसने किए, लेकिन उसने तालिबान को चेतावनी दी कि वह अपनी जमीन पर ज्ज्च् को पनाह न दे।
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बना
अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से ज्ज्च् ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ रखा है। ज्ज्च् को पिछले बारह साल में पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा आतंकवादी खतरा माना जा रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि ज्ज्च् के लड़ाके सीमा पार अफगानिस्तान से ट्रेनिंग लेकर पाकिस्तान लौटते और हमला करते हैं। हालांकि तालिबान दावा करता है कि वह ज्ज्च् का समर्थन नहीं करता। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, देश में आतंकवादी हमले 2015 के बाद सबसे ज्यादा हो गए हैं और ज्ज्च् ही इसकी मुख्य वजह है। वैश्विक आतंकवाद सूचकांक के इन हमलों की वजह से ही पाकिस्तान आतंकवाद प्रभावित देशों की सूची में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।
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