UCC Protest : महाराष्ट्र में प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर विरोध के स्वर सामने आए हैं। ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड की ओर से शनिवार, 31 अक्टूबर को मुंबई में एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान प्रस्तावित UCC के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और इसके संवैधानिक, सामाजिक एवं कानूनी प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई। कॉन्फ्रेंस में शामिल प्रतिनिधियों ने महाराष्ट्र सरकार के समक्ष अपने सुझाव और आपत्तियां रखीं।
UCC को लेकर संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक विविधता पर चर्चा
कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने यूनिफॉर्म सिविल कोड के संभावित प्रभावों पर अपने विचार रखे। इस दौरान संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक विविधता और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी नए कानून को लागू करने से पहले उसके सामाजिक प्रभावों का व्यापक अध्ययन किया जाना चाहिए। साथ ही सभी संबंधित समुदायों और संगठनों से संवाद स्थापित करना जरूरी है।
शिक्षाविद शबाना खान ने उठाए सवाल
कॉन्फ्रेंस में प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं प्रिंसिपल शबाना खान ने प्रस्तावित UCC को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड संविधान में दिए गए अधिकारों और देश की सामाजिक विविधता से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। शबाना खान ने सरकार को सुझाव दिया कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले समाज के सभी वर्गों की राय ली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून बनाते समय नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक परिस्थितियों का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र का समाज प्रस्तावित UCC को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही सरकार से इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक बातचीत करने की अपील की।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेजा गया ज्ञापन
कॉन्फ्रेंस के दौरान UCC को लेकर कई सुझाव और प्रस्ताव तैयार किए गए। आयोजकों के अनुसार, इन प्रस्तावों और ज्ञापन की प्रतियां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति और राज्यपाल को भेजी गईं। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की गई कि प्रस्तावित कानून के संबंध में निर्णय लेने से पहले विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और कानूनी संगठनों के विचारों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
मौलाना साबित अली नक्शबंदी की अध्यक्षता में हुई कॉन्फ्रेंस
इस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता मौलाना साबित अली नक्शबंदी ने की। कार्यक्रम में एडवोकेट सलमान शेख, मौलाना नौशाद अहमद सिद्दीकी, सईद अकबर खान, अल्लामा बुनाई हसनी, रईस खान और सलीम सोपारीवाला सहित सामाजिक, शैक्षणिक और कानूनी क्षेत्रों से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। प्रतिनिधियों ने UCC से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए सरकार से संवाद और परामर्श की प्रक्रिया अपनाने का आग्रह किया।
सरकार से सभी पक्षों के साथ बातचीत की अपील
कॉन्फ्रेंस में ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रतिनिधियों ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सरकार से संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक विविधता और विभिन्न समुदायों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने की अपील की। फिलहाल इस कॉन्फ्रेंस में रखी गई आपत्तियां और सुझाव आयोजकों तथा वक्ताओं के विचार हैं। महाराष्ट्र सरकार की ओर से इन सुझावों पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।
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