Rajendra Sen : दिल्ली में एनएसयूआई नेता ऋतु बराला के साथ कथित मारपीट के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज करने को लेकर उठे विवाद के बीच एडवोकेट राजेन्द्र सेन ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य और ऑल इंडिया कांग्रेस ओबीसी विभाग के पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर राजेन्द्र सेन ने कहा कि जब कानून में जीरो एफआईआर दर्ज करने का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है, तो पुलिस प्रशासन कार्रवाई करने में हिचकिचाहट क्यों दिखा रहा है? उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और देरी के कारणों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
कानून में प्रावधान होने के बावजूद जीरो FIR पर विवाद क्यों?
एडवोकेट राजेन्द्र सेन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(1) का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना घटना के क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना किसी भी पुलिस थाने में दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का उद्देश्य पीड़ित को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी रोकना है। धारा 173(1) में क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना संज्ञेय अपराध की सूचना देने का प्रावधान है। हालांकि, एक ही घटना के संबंध में पहले से दर्ज मामले के संदर्भ में दूसरी एफआईआर का सवाल अलग कानूनी विचार का विषय हो सकता है। राजेन्द्र सेन ने सवाल उठाया कि जब जीरो एफआईआर का कानूनी प्रावधान मौजूद है, तो ऋतु बराला प्रकरण में कार्रवाई को लेकर विवाद क्यों बना हुआ है? उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी निष्पक्षता के साथ कानून के अनुसार कार्रवाई करना है। यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध के आरोप हैं, तो उनका नियमानुसार परीक्षण होना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं किसी दबाव या अन्य कारण से कार्रवाई प्रभावित तो नहीं हो रही है। साथ ही ऐसी आशंकाओं को दूर करने के लिए प्रशासन से पारदर्शी स्पष्टीकरण देने की मांग की।
पंचायत चुनावों से कांग्रेस का ध्यान भटकने की आशंका
राजेन्द्र सेन ने इस पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक समय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि राजस्थान में पंचायत चुनावों के बीच विवाद लंबा खिंचने से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का ध्यान चुनावी तैयारियों से भटक सकता है। उन्होंने कहा कि इस समय कांग्रेस के सामने गांवों में संगठन को मजबूत करने, आम जनता की समस्याओं को उठाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद का जल्द और निष्पक्ष समाधान होना चाहिए।
जीरो FIR दर्ज नहीं करने पर जयपुर पुलिस का पक्ष
इस मामले में जयपुर पुलिस का कहना है कि ऋतु बराला से जुड़ी घटना की शिकायत दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में पहले से दर्ज है और मामले की जांच वहां चल रही है। इसी आधार पर जयपुर पुलिस ने अलग से जीरो एफआईआर दर्ज करने से इनकार किया है। जीरो एफआईआर की मांग को लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में कांग्रेस नेताओं ने करीब दो दिन तक धरना दिया। बुधवार को पुलिस के लिखित जवाब के बाद धरना समाप्त कर दिया गया। कांग्रेस ने इस मामले में अदालत का रुख करने की बात कही है। राजेन्द्र सेन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून सर्वोपरि है और पुलिस प्रशासन को किसी भी राजनीतिक दबाव या अन्य प्रभाव से मुक्त रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीरो एफआईआर की व्यवस्था का मूल उद्देश्य यही है कि पीड़ित को न्याय पाने के लिए अलग-अलग पुलिस थानों के क्षेत्राधिकार के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। उन्होंने मांग की कि ऋतु बराला से जुड़े कथित मारपीट प्रकरण में शिकायत और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कानून सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही जीरो एफआईआर दर्ज नहीं करने के कारणों को स्पष्ट किया जाए, ताकि पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके। राजेन्द्र सेन ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए और कानून के प्रावधानों का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।


