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श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव देव गिरी बोले -चढ़ावा चोरी के पीछे षड्यंत्र, चंपत राय बेदाग-निष्कलंक

Govind Dev Giri

Govind Dev Giri : श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव गोविन्द देव गिरी ने राम मंदिर चढावा चोरी को एक षडयंत्र करार दिया है साथ ही कहा कि इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। गोविन्द देव गिरी ने ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष चंपत राय का पक्ष लेते हुए उन्हे बेदाग और निष्कलंक छवि वाले बताया है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बनने के बाद पहली बार दिए एक इंटरव्यू में देव गिरी ने कहा कि चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।’

कमी रही इसलिए चोरी हुई

राम मंदिर में चढावा चोरी को स्वीकारते हुए देव गिरी ने कहा कि ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’ उन्होंने कहा- चढ़ावा चोरी के पीछे हमें कुछ षड्यंत्र नजर आता है। घटना हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन पूरे घटनाक्रम को जिस तरह पेश किया गया, उस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

राम मंदिर देश के मंदिरों के लिए आदर्श बने

श्रीराम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव गोविन्द देव गिरी ने कहा कि वह चाहते हैं कि देश के मंदिरों के लिए राम मंदिर आदर्श बने। मंदिर की व्यवस्था से लोग प्रेरणा लेकर जाएं। व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए अयोध्या के लोगों और मंदिर के बीच संवाद मजबूत हो। यह उनकी प्राथमिकता होगी।

व्यवस्था बदलनी पड़ेगी

गोविन्द देव गिरी ने कहा कि कई बैंकों के लोग आकर सुझाव दे चुके हैं। नई व्यवस्था के बारे में विचार-विमर्श के बाद तय कर दी जाएगी। तब इसके बारे में विस्तार से बताया जाएगा। कोशिश यही रहेगी कि चढ़ावे की प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी हो। महासचिव के रूप में ज्यादा समय देना पड़ेगा। मुझे अपनी व्यवस्था थोड़ी बदलनी पड़ेगी। प्रभु राम की सेवा के लिए जितना समय देना पड़ेगा, मैं दूंगा। मेरे लिए पद नहीं, रामलला की सेवा महत्वपूर्ण है।

ट्रस्ट में पहली बार निर्मला यादव को महिला ट्रस्टी बनाया

ट्रस्ट में पहली बार निर्मला यादव को महिला ट्रस्टी बनाए जाने पर गोविन्द गिरी ने कहा कि हमें माताओं को साथ लेकर चलना चाहिए। यही मेरी सोच है। निर्मला जी की प्रोफाइल मैंने पढ़ी है। उनके अनुभव और योग्यता के अनुसार यहां उनकी आवश्यकता है। वह संस्कृत और हिंदी से एमए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बहुत काम किया है। उनकी योग्यता और अनुभव का लाभ ट्रस्ट को मिलेगा।

सीईओ और ट्रस्ट के बीच तालमेल जरुरी

गोविन्द देव गिरी ने कहा कि सीईओ और न्यास के बीच तालमेल होना जरुरी है क्योंकि हमारा न्यास जो तय करेगा, उसे कैसे लागू करना है, उसकी जिम्मेदारी सीईओ की होगी। इसलिए दोनों के बीच तालमेल बहुत अच्छा होना चाहिए। जिम्मेदारियां अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है।

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