UPI Service : काठमांडू में लन्च के लिए भोजन खरीदने की सुविधा देने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा बनाई गई डिजिटल भुगतान व्यवस्था अब नेपाल में आपदा राहत में काम आ रही है। नई दिल्ली में स्थित नेपाल के दूतावास ने नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में दान देने वाले भारतीय उपयोगकर्ताओं से अपने यूपीआई ऐप में अंतरराष्ट्रीय भुगतान सुविधा (यूपीआई इंटरनैशनल) सक्रिय करने की अपील की है। माना जा रहा है कि किसी विदेशी सरकार की राहत अपील के लिए यूपीआई इंटरनैशनल का यह पहला इस्तेमाल है।
यूपीआई इंटरनेशनल का दायरा बढ़ा
यह यूपीआई इंटरनैशनल के इस्तेमाल के तरीके में भी बदलाव को दर्शाता है। अब तक इसका सीमा-पार इस्तेमाल मुख्य रूप से विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों द्वारा स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों को भुगतान करने तक सीमित रहा है। नेपाल की राहत अपील ने इसका दायरा उन भारतीय उपयोगकर्ताओं तक भी बढ़ा दिया है जो शायद कभी भारत से बाहर यात्रा न करें।
चीन की अलीपे और यूनियन पे से साझा
भारत की यूपीआई इंटरनैशनल, चीन की अलीपे प्लस और यूनियन पे जैसी भुगतान प्रणालियों के साथ मिलकर आपदा प्रभावित नेपाल में सीमा-पार राहत दान की सुविधा उपलब्ध करा रही है। हालांकि पर्यटन और सुविधा से आगे बढ़कर सीमा-पार भुगतान के इस्तेमाल का दायरा बढ़ रहा है लेकिन उद्योग जगत के एक सूत्र ने कहा कि संभावित धोखाधड़ी पर भी नजर रखना जरूरी है।
यूपीआई की विदेश में भारतीय मुद्रा में बदलाव
दानदाताओं को डिजिटल भुगतान ऐप में यूपीआई इंटरनैशनल सुविधा सक्रिय करनी होगी ताकि वे नेपाल सरकार द्वारा सूचीबद्ध अधिकृत ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के जरिए भुगतान कर सकें। किसी खास देश के लिए यह सुविधा सक्रिय करने के बाद भारतीय उपयोगकर्ता एक सप्ताह तक उस देश में लेनदेन कर सकते हैं। भुगतान की राशि दर्ज करते समय उपयोगकर्ताओं को उसका मूल्य भारतीय रुपये से नेपाली रुपये में परिवर्तित होकर दिखाई देता है।
दूतावास ने की भारतीय उपयोगकर्ताओं से अपील
भारत स्थित नेपाल दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘भारत में हमारे वे मित्र और शुभचिंतक, जिन्हें निर्धारित क्यूआर कोड स्कैन करके नेपाल सरकार के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में योगदान करने में कठिनाई हो रही है, उनसे अनुरोध है कि भुगतान करने से पहले अपने यूपीआई/बैंकिंग ऐप में ‘यूपीआई इंटरनैशनल’ सक्रिय कर लें।’ दान की यह अपील नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बीच की गई है। इस बाढ़ में करीब 1,000 लोगों की जान जा चुकी है जबकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों समेत लगभग 4,000 लोग अब भी लापता हैं।
विदेशी संस्था का यूपीआई चुनना अहम
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि कोई विदेशी संस्था पारंपरिक बैंकिंग माध्यमों के बजाय धन एकत्र करने के लिए यूपीआई का विकल्प चुन रही है। हमारा मानना है कि जैसे-जैसे वैश्विक संस्थाएं यह समझेंगी कि भुगतान प्राप्त करने के विकल्प के रूप में यूपीआई उपलब्ध कराने से उनके लिए भुगतान करना आसान हो जाता है, इस तरह के इस्तेमाल का दायरा बढ़ेगा।’
मार्च 2024 में नेपाल में शुरु की थी सेवा
मार्च 2024 में एनआईपीएल और नेपाल के सबसे बड़े भुगतान नेटवर्क फोनपे पेमेंट सर्विस ने दोनों देशों के बीच सीमा-पार यूपीआई भुगतान सेवा शुरू की। नेपाल में अगस्त 2024 में सेवा शुरू होने के छह महीने के भीतर यूपीआई पर एक लाख लेनदेन का आंकड़ा पार हो गया। पहले चरण में क्यूआर कोड आधारित व्यक्ति से कारोबारी लेनदेन शामिल थे। भटनागर ने आगे कहा, ‘यह भारत के बाहर यूपीआई की यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। यूपीआई इंटरनैशनल को अब तक मुख्य रूप से विदेश यात्रा करने वाले पर्यटकों और प्रवासी भारतीयों के लिए सुविधा के रूप में देखा जाता रहा है।
पहली बार आपदा में उपयोग
लेकिन नेपाल दूतावास द्वारा प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में दान के लिए इसे अलीपे और यूनियनपे के साथ सूचीबद्ध करना अलग बात है। यह दर्शाता है कि किसी विदेशी सरकार ने यूपीआई को धन प्राप्त करने के एक वैध और विश्वसनीय माध्यम के रूप में मान्यता दी है।’
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