Ajmer Nagar Nigam : राजस्थान में निकाय चुनावों का आगाज होने के साथ ही नगर निगम अजमेर चुनाव 2026 को लेकर कांग्रेस में टिकट की दावेदारी तेज हो गई है। अजमेर उत्तर और दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के कुल 80 वार्डों में संभावित प्रत्याशियों के चयन को लेकर पार्टी स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने गुरुवार देर रात जिला प्रभारियों, सह-प्रभारियों और को-ऑर्डिनेटर्स के साथ बैठक कर अजमेर नगर निगम के संभावित प्रत्याशियों को लेकर फीडबैक लिया। बैठक में सभी 80 वार्डों की राजनीतिक स्थिति और दावेदारों के नामों पर चर्चा की गई।
अजमेर के सभी 80 वार्डों पर हुआ मंथन
बैठक में अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल, राजस्थान पर्यटन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह राठौड़, अजमेर की सह-प्रभारी एवं प्रदेश सचिव रूबी खान, रंजीत चंदेलिया और हेतराम सिंगाथिया ने अजमेर उत्तर और दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के वार्डों को लेकर प्रदेश नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट और फीडबैक दिया। बताया जा रहा है कि पार्टी ने कई वार्डों में तीन-तीन संभावित प्रत्याशियों का पैनल तैयार किया है। अब प्रदेश नेतृत्व इन नामों पर अंतिम स्तर पर मंथन करेगा।
1300 आवेदन की चर्चा, महिलाओं की दावेदारी सबसे ज्यादा
नगर निगम अजमेर में इस बार महापौर का पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने के चलते महिला दावेदारों की संख्या में खासा इजाफा देखने को मिल रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम के 80 वार्डों के लिए कांग्रेस के पास करीब 1300 टिकट आवेदन पहुंचे हैं। इनमें 700 से अधिक आवेदन महिलाओं के बताए जा रहे हैं। महापौर पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और उनके परिवारों से जुड़ी महिला दावेदार भी पार्षद टिकट की दौड़ में बताई जा रही हैं।
पुराने प्रत्याशियों की दावेदारी ने बढ़ाई कांग्रेस की चुनौती
कांग्रेस के सामने टिकट वितरण में पुराने चुनावी रिकॉर्ड को लेकर भी चुनौती खड़ी हो सकती है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पिछले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ चुके कुछ नेताओं ने भी इस बार टिकट के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा पिछला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके कुछ ऐसे दावेदार भी दोबारा मैदान में हैं, जिनका प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक निष्ठा, पिछले चुनावी प्रदर्शन और वर्तमान जनाधार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
मौजूदा पार्षदों को मिल सकती है प्राथमिकता
कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संभावित प्रत्याशियों के चयन में मौजूदा पार्षदों के प्रदर्शन को भी महत्व दिया जा रहा है। प्रत्याशियों के पैनल तैयार करते समय जातीय समीकरण, स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियां, क्षेत्र में सक्रियता, जमीनी पकड़, संगठन के साथ तालमेल और चुनाव जीतने की क्षमता जैसे पहलुओं को प्रमुख आधार बनाया गया है। पार्टी का फोकस इस बार केवल टिकट के लिए आवेदन करने वाले नेताओं पर नहीं, बल्कि चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले चेहरों पर बताया जा रहा है।
कांग्रेस पदाधिकारियों और परिवारों से भी टिकट की मांग
कांग्रेस के लिए टिकट वितरण की एक और चुनौती संगठन के भीतर से आ रही दावेदारी है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के कई पदाधिकारी स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में कांग्रेस नेतृत्व को संगठन के पदाधिकारियों, पुराने कार्यकर्ताओं, वर्तमान पार्षदों और नए दावेदारों के बीच संतुलन बनाना होगा।
गुटबाजी के बीच एकजुटता साधने की कोशिश
अजमेर कांग्रेस में लंबे समय से अलग-अलग नेताओं और खेमों के बीच राजनीतिक खींचतान की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में गोविंद सिंह डोटासरा की ओर से सभी स्तर के नेताओं से सीधे फीडबैक लेने की कवायद को सियासी तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश टिकट वितरण से पहले स्थानीय नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और चुनाव में एकजुट होकर उतरने की है। अजमेर की राजनीति में सचिन पायलट खेमे का प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है, जबकि पार्टी में अन्य वरिष्ठ नेताओं से जुड़े समर्थकों की भी मजबूत मौजूदगी है। ऐसे में टिकटों का अंतिम चयन कांग्रेस के लिए राजनीतिक संतुलन की परीक्षा भी होगा।
‘जीतने वाले चेहरे’ पर कांग्रेस का फोकस
नगर निगम चुनाव में कांग्रेस इस बार प्रत्याशी चयन को लेकर सतर्क नजर आ रही है। पार्टी के भीतर यह रणनीति बताई जा रही है कि केवल दावेदारी या राजनीतिक सिफारिश के आधार पर टिकट देने के बजाय संबंधित वार्ड में मजबूत जनाधार और चुनाव जीतने की क्षमता को प्राथमिकता दी जाए। भाजपा शासित नगर निगम बोर्ड के कामकाज को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों के बीच कांग्रेस अपने लिए चुनावी संभावनाएं देख रही है। हालांकि पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण के बाद असंतोष और अंदरूनी खींचतान को रोकते हुए सभी गुटों को एक साथ चुनाव मैदान में उतारने की होगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व 80 वार्डों में किन चेहरों पर भरोसा जताता है और टिकट वितरण में मौजूदा पार्षदों, महिला दावेदारों और नए चेहरों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।
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