Kiren Rijiju : केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर कहा कि हजारों लोगों के प्रदर्शन के बावजूद एक भी गोली नहीं चली और किसी प्रदर्शनकारी को गंभीर चोट नहीं लगी। उन्होंने कहा- अगर ऐसा आंदोलन कांग्रेस के दौर में हुआ होता, तो हजारों लोगों की मौत हो सकती थी। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस नक्सली पार्टी बनती जा रही है पहले वो मुस्लिम लीगी बन चुकी। रिजिजू ने कहा है कि जेन-जी हमारे अपने बच्चे हैं और उनसे लगातार बातचीत जरूरी है। उनसे बातचीत करने में सरकार की तरफ से कोई कमी नहीं है।
आप नेता छात्र नेता कैसे बन गए
रिजिजू ने कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा- दीपके आप कार्यकर्ता हैं। छात्र कैसे बन गए? दीपके महाराष्ट्र से हैं, लेकिन वे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल छात्रों के आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं।
रिजिजू बोले- राहुल को नेता प्रतिपक्ष पद की गरिमा रखनी चाहिए
रिजिजू ने कहा- राहुल गांधी सदन के अंदर जैसा व्यवहार करते हैं, क्या वे नेता प्रतिपक्ष जैसे दिखाई देते हैं? मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है। हम मिलते हैं, बातचीत करते हैं। लेकिन नेता प्रतिपक्ष को अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए काम करना चाहिए और उसी हिसाब से सदन में बोलना चाहिए। राहुल ने एक खास तरह की शैली अपनाई है और उनके सांसद भी उसी तरह व्यवहार करने लगे हैं।
किसी की जान नहीं गई, पुलिस की तारीफ होनी चाहिए
रिजिजू ने कहा- दिल्ली प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान एक भी लाठी नहीं चलाई। पुलिस ने तब कार्रवाई की, जब प्रदर्शनकारी जबरदस्ती संसद की ओर बढ़ने लगे। किसी की हड्डी नहीं टूटी। कोई प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। किसी की मौत नहीं हुई। पुलिस की तारीफ होनी चाहिए।
कांग्रेस नक्सली पार्टी बनती जा रही
15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर कांग्रेस के विरोध को लेकर रिजिजू ने कहा- एक तरह से कांग्रेस पार्टी माओवादी और नक्सली संगठन जैसी बनती जा रही है। उन्होंने आगे कहा-सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली नेशनल एडवाइजरी काउंसिल में पहले ऐसी विचारधारा रखने वाले लोगों का प्रभाव था। अब पूरी कांग्रेस पार्टी माओवादी पार्टी की तरफ बढ़ती दिख रही है। इससे पहले कांग्रेस मुस्लिम लीग जैसी पार्टी बन चुकी थी। जंगल में हथियार उठाने वाले नक्सलियों को काफी हद तक खत्म किया जा चुका है, लेकिन उनकी विचारधारा शहरी इलाकों में अभी भी मौजूद है। उससे भी निपटना जरूरी है। कांग्रेस ने इसे अपने ऊपर क्यों लिया, यह समझ से परे है।
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