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रुस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सिनेट में पास

American sinet passed bill

Bill Passed : अमेरिकी सीनेट ने उस बिल को पास कर दिया है जिसमें कहा गया है कि रुस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की अधिकार राष्ट्रपति को होगा। सिनेट ने रूस और ईरान पर सख्त कार्रवाई वाले बाइपार्टिसन बिल को 86-11 वोट से पास कर दिया है। बिल में ट्रंप को टॉप फाइव इंपोर्टर्स में शामिल देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की ताकत दी गई है। चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया इसके दायरे में आते हैं। हालांकि, टैरिफ लगना ऑटोमैटिक नहीं होगा। ट्रंप अमेरिकी नेशनल इंटरेस्ट के आधार पर इसे लागू करने, टालने, हटाने या बदलने का फैसला कर सकते हैं।

पहले 500 टैरिफ का था प्रपोजल

सीनेट से पास हुआ मौजूदा बिल पहले के प्रपोजल के मुकाबले कुछ नरम है। पुराने प्रपोजल में रूस की एनर्जी खरीदने वाले देशों के सामान पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। मौजूदा बिल में अधिकतम टैरिफ 100 फीसदी रखा गया है। अब यह बिल अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा, जिसकी बैठक 31 अगस्त से दोबारा शुरू होगी।

भारत के लिए क्या बदल सकता है?

भारत 2022 में रूस-यूक्रेन वॉर शुरू होने के बाद से डिस्काउंटेड रूसी क्रूड के बड़े बायर्स में शामिल रहा है। अगर ट्रंप टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं तो भारतीय एक्सपोर्टर्स पर दबाव बढ़ सकता है। इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्युटिकल्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टर्स प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि डिफेंस, टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक कोऑपरेशन जैसे भारत-अमेरिका संबंधों के दूसरे पहलू भी ट्रंप के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही नई दिल्ली पर रूसी एनर्जी पर अपनी डिपेंडेंस कम करने का दबाव भी बढ़ सकता है।

रूस को निशाना बनाने की वजह क्या है?

वॉशिंगटन का कहना है कि दूसरे देश जब रूस से एनर्जी खरीदते हैं तो इससे मॉस्को को रेवेन्यू मिलता है और यूक्रेन में चल रही जंग को जारी रखने में मदद मिलती है। बिल में रूस के लीडर्स, अधिकारियों, ओलिगार्क्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर भी सैंक्शंस लगाने का प्रपोजल है। इसके अलावा 1996 के ईरान सैंक्शंस एक्ट को 2031 तक बढ़ाने और ईरान के एनर्जी, शिपिंग और फाइनेंशियल सेक्टर्स पर कार्रवाई बढ़ाने की बात भी कही गई है।

लिंडसे ग्राहम के नाम पर क्यों है बिल?

इस बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था। ग्राहम की 11 जुलाई को कीव की यात्रा के बाद अचानक मौत हो गई थी। इसके बाद दोनों पार्टियों के सांसदों ने यूक्रेन के समर्थन में उनके काम को देखते हुए इस बिल को आगे बढ़ाया। इसी वजह से इसका नाम लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शन्ड रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 रखा गया है।

अमेरिका में भी बिल को लेकर विरोध

कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप को मिलने वाली टैरिफ पावर पर सवाल उठाए हैं। ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर का कहना है कि इससे राष्ट्रपति को बहुत ज्यादा टैरिफ अथॉरिटी मिल जाएगी, जिसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। उनका कहना है कि इससे रूस को जवाब देने के बजाय अमेरिकियों पर ही महंगे सामान और ट्रेड वॉर का बोझ पड़ सकता है।

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