KBP Times

दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को दी राहत, शुद्वता के दावे पर रोक पर दिया स्टे

Delhi highcourt give stay to dabur product

FSSAI : डाबर के 100 प्रतिशत शुद्वता के दावे वाले प्रोडक्ट्स पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बिक्री रोकने वाले आदेश पर स्टे दे दिया है। स्टे लग जाने के बाद अब बाजार में डाबर के हनी-घी पहले की तरह बिकते रहेंगे।

डाबर को राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें 100 प्रतिशत प्योर, 100 प्रतिशत नेचुरल और 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और एफ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा।

डाबर के प्रोडक्ट्स और दावों पर रोक

FSSAI ने डाबर के उन प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई की थी जिनके लेबल पर 100 प्रतिशत प्योर, 100 प्रतिशत नेचुरल और 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक लिखा होता है। इनमें प्रमुख रूप से डाबर हनी , डाबर हनी स्क्वीजी, डाबर सुंदरबंस हनी, डाबर हिमालयन एपल साइडर विनेगर, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल, डाबर काउ घी, रियल एक्टिव 100 प्रतिशत टेंडर कोकोनट वॉटर, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर ऑर्गेनिक हनी शामिल हैं।

डाबर के दावों पर एतराज

जानकारी के अनुसार FSSAI का कहना था कि लेबल पर 100 प्रतिशत जैसे दावों का इस्तेमाल अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला है। नियामक का तर्क था कि इन दावों की कोई वेरिफिकेशन नहीं की जा सकती। इससे ग्राहकों को गलत जानकारी मिलने की संभावना बनी रहती है।

डाबर ने आदेश को कोर्ट में चुनौती दी

डाबर का मुख्य तर्क यह था कि FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस, 2018 के तहत तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। डाबर के अनुसार, कार्रवाई करने से पहले कंपनी को न तो कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया और ना ही कोई सुधार नोटिस। कंपनी को अपना पक्ष रखने या स्पष्टीकरण देने का मौका दिए बिना ही अचानक बिक्री रोकने का आदेश जारी कर दिया गया।

डाबर ने कानूनी और तकनीकी आधार पर कमियां बताईं

डाबर ने तर्क दिया कि FSSAI ने एक्ट, 2006 की धारा 18 केवल मार्गदर्शक सिद्धांत तय करती है, यह किसी अधिकारी को सीधे बिक्री रोकने का अधिकार नहीं देती। इसके अलावा, आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि 100 प्रतिशत प्योर या 100 प्रतिशत नेचुरल जैसे शब्द नियमों का उल्लंघन कैसे करते हैं। कंपनी ने कहा कि सिंगल-इन्ग्रीडिएंट या पूरी तरह प्राकृतिक उत्पादों के लिए 100 प्रतिशत प्योर कहना अपने आप में भ्रामक नहीं माना जा सकता। डाबर ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि FSSAI ने अपने आदेश में यह कहीं नहीं कहा है कि ये उत्पाद मिलावटी, असुरक्षित, नकली या घटिया हैं। यह विवाद केवल पैकेट के लेबल और विज्ञापनों पर लिखे शब्दों तक सीमित है।

यह भी पढ़ें –सोने की कीमत बढ़कर 1.48 लाख हुई, चांदी आज बढ़कर 2.25 लाख पर पहुंची

यह भी देखें- गलताजी का सबसे बड़ा रहस्य! आखिर क्यों कभी नहीं सूखता पवित्र गलता कुंड? | Jaipur Galta Ji | KBP Times

 

ताजा खबरें

ताजा खबरें

Strike Against Adulteration

मिलावट पर वार; केंद्रीय खाद्य सुरक्षा दल की झोटवाड़ाऔर मुहाना मंडी की फर्मों पर कार्रवाई

CJP and Delhi High Court

दिल्ली कोर्ट ने आशुतोष-सौरव की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाई; CJP का रिहाई में जानबूझकर देरी का आरोप

Pratap singh Khachriyawas

जयपुर में प्रताप खाचरियावास का आरोप- VLTD डिवाइस के नाम पर 1000 करोड़ का घोटाला

Shashi Tharoor MP

कांग्रेस सांसद थरूर बोले- हमारा मकसद SIR प्रक्रिया को वापस लेना, सरकार गिराना टारगेट नही

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने दी दुष्कर्म की नाबालिग पीड़िता को गर्भपात की इजाजत

Cartoon

मास्टर जी सावधानी रखना…

selection commettee

BCCI में फेरबदल; प्रज्ञान ओझा चीफ सिलेक्टर बने, कमेटी में रमेश पोवर को किया शामिल

Questions of Oppositions

सत्ता से सवाल पूछने वाले खुद पर आरोपों का जवाब देंगे कब ?

Meta

केन्द्र सरकार ने मेटा से कहा-एक तरफा नैरेटिव वाला कंटेंट नहीं हो, एल्गोरिदम की करें समीक्षा

2

2