Omar Abdullah Divorce: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला ने अपनी शादी खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने आपसी सहमति से तलाक लेने और एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी लंबित कानूनी मुकदमों को वापस लेने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देते हुए मामले का निपटारा करने की बात कही है. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोनों ‘आजादी’ चाहते हैं और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत तलाक की डिक्री जारी करने का अनुरोध किया गया है.
जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व कर रहे एड़वोकेट कपिल सिब्बल ने पीठ को अवगत कराया कि दंपति ने आपसी मतभेदों को पूरी तरह से सुलझा लिया है. दोनों ने आजादी को अपना लिया है. दोनों ने आपसी सहमति से शादी को खत्म करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए 22 जुलाई को याचिका दाखिल की है. सिब्बल की दलील सुनने के बाद जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि कोर्ट अब समझौते की शर्तों के अनुसार ही उचित आदेश जारी कर मामले का निस्तारण करेगी.
2011 से अलग रह रहे थे दोनों पति-पत्नी
उमर अब्दुला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला ने साल 1994 में शादी की थी. उनके दोनों के दो बेटे जाहिर और जमीर है. 2009 से ही दोनों अलग-अलग रहने लगे थे और साल 2011 में उमर अब्दुला ने सार्वजनिक रूप से 17 साल पुराने शादी के अलग होने का ऐलान किया था. सबसे पहले फैमिली कोर्ट में उमर अब्दुल्ला ने तलाक की अर्जी दी थी. फैमिली कोर्ट ने आरोपी को अस्पष्ट बताते हुए 2016 में अर्जी को खारिज कर दिया था. जिसके बाद उमर अब्दुला ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2023 में फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और पायल अब्दुल्ला को मासिक भरण पोषण के लिए हर महीने 1.5 लाख रुपये और बेटे की पढ़ाई के लिए 60 हजार रुपये हर माह देने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के इस आदेश को उमर अब्दुला ने चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले को मध्यस्थता के लिए भेजे जाने के बाद दोनों पक्षों ने सभी कानूनी लड़ाइयों को खत्म कर आपसी सहमति से सम्मानजनक विदाई का रास्ता चुना है.
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