RSS : एक बार फिर से अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने भारतीय संगठन आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से आरएसएस नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने को कहा है। आयोग के चेयरमैन आसिफ महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के सदस्य हैं और इसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं।
भागवत अमेरिका, कनाडा दौरे पर जाएंगे
पाकिस्तानी मूल के महमूद का यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले आया है। जानकारी के अनुसार भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। भागवत सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे और शिकागो में वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस को संबोधित किया था। उपलब्ध रिपोर्टों में इस दौरे में उनकी किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या औपचारिक राजनयिक सम्मान का जिक्र नहीं मिलता।
आयोग के कमिश्नर बोले- आरएसएस नेताओं को सम्मान न मिले
अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के कमिश्नर जीन मिल्स ने भी अपने बयान में कहा है कि अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए।
भागवत के कनाडा दौरे का समर्थन किया
इधर कनाडा में भी आरएसएस प्रमुख के दौरे को लेकर कुछ लोगों ने विरोध किया है और कनाडा सरकार को भागवत का दौरा नहीं करने देने की मांग की है तो इसके जवाब में कनाडा में 100 से ज्यादा संगठनों ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और मंत्रियों को पत्र लिखकर भागवत को रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की। संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पुख्ता और स्वतंत्र सबूत होने चाहिए और कानून के मुताबिक पूरी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
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