Human Rights : राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा सोमवार को शासन सचिवालय में 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 27 जुलाई से 14 अगस्त तक आयोजित इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए विभिन्न राज्यों के 18 विधि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 40 विद्यार्थियों का चयन किया गया हैं।
मानवाधिकारों की अवधारणा कानूनी प्रावधानों तक सीमित नहीं
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि एवं आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जी.आर. मूलचंदानी ने कहा कि मानवाधिकारों की अवधारणा केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय गरिमा, समानता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी यदि मानवाधिकारों के मूल्यों को व्यवहार में अपनाए तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस इंटर्नशिप को सीखने, समझने और अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाने का अवसर मानते हुए पूरे मनोयोग से भाग लेने का आह्वान किया।
जीवन में समय से अधिक मूल्यवान कुछ नहीं
आयोग के सदस्य अशोक कुमार गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में समय से अधिक मूल्यवान कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समय का सम्मान करना सीख लेता है, वही अपने लक्ष्य को प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इंटर्नशिप के प्रत्येक सत्र में सक्रिय सहभागिता करें तथा विशेषज्ञों के अनुभवों से अधिकतम सीख प्राप्त करें।
इंटर्नशिप शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन के लिए अवसर
आयोग के पुलिस महानिरीक्षक हिंगलाजदान ने प्रतिभागियों से कहा कि यह इंटर्नशिप उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रत्येक सत्र में पूरे मनोयोग और अनुशासन के साथ भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि विशेषज्ञों के अनुभवों एवं मार्गदर्शन का अधिकतम लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि यहां अर्जित ज्ञान और अनुभव भविष्य में उन्हें एक संवेदनशील एवं जिम्मेदार विधि विशेषज्ञ बनने में सहायक सिद्ध होंगे।
विशेषज्ञ विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगें
कार्यक्रम कॉर्डिनेटर एवं आयोग की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संध्या यादव ने बताया कि इंटर्नशिप के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 50 विशेषज्ञ विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। इनमें न्यायिक सेवाओं, शिक्षण संस्थानों, पुलिस एवं प्रशासनिक सेवाओं, गैर-सरकारी संगठनों, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, यूनिसेफ, वरिष्ठ अधिवक्ताओं तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं।
इन विषयों पर होंगे व्याख्यान
कार्यक्रम में महिला एवं बाल अधिकार, कमजोर वर्गों के अधिकार, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम, लैंगिक समानता, कारागार प्रशासन, सुशासन, सूचना का अधिकार, फॉरेंसिक विज्ञान, आपराधिक न्याय प्रणाली, बौद्धिक संपदा अधिकार, संवैधानिक नैतिकता, एलजीबीटीक्यू अधिकार, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, आम्बेडकर फिलोसफी, एंटी डोपिंग, साइबर अपराध तथा एआई जैसे समसामयिक विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर आयोग के रजिस्ट्रार जगदीश प्रसाद शर्मा, सचिव जयदेव सी.एस., उप सचिव प्रगति आसोपा सहित आयोग के अधिकारी एवं सभी प्रतिभागी उपस्थित रहे।
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