Meta : भारत के बाद अमेरिका में भी फेसबुक और इंस्टाग्राम की मदर कंपनी मेटा पर कानूनी संकट मंडरा रहा है. भारत सरकार ने वाट्सएप पर नए यूजरनेम फीचर्स और इंस्टाग्राम पर बाल यौन के विज्ञापन से जुडे मामलों को लेकर सख्ती दिखाई और नोटिस जारी कर जवाब मांगा है वहीं फेसबुक और इंस्टाग्राम की मदर कंपनी मेटा पर कानूनी संकट मंडरा रहा है. अमेरिका के चार बड़े राज्यों ने मेटा पर बच्चों और युवाओं को जानबूझकर अपने प्लेटफॉर्म का एडिक्ट यानी लत लगाने और मेंटल हेल्थ से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है.
आरोप और मेटा का जवाब
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 4 राज्यों का आरोप है कि मेटा ने जानबूझकर फेसबुक और इंस्टाग्राम को इस तरह डिजाइन किया, जिससे बच्चे और युवा स्क्रीन से चिपके रहें, और कंपनी ने इसके खतरों को लेकर जनता से झूठ बोला है. वहीं मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म्स को एडिक्टिव बताते वाले आरोपों को गलत बताया है. अपनी सफाई में कंपनी ने तर्क दिया कि सोशल मीडिया एडिक्शन को कोई आधिकारिक मानसिक बीमारी नहीं माना गया है.
मेटा से भारी जुर्माना
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला इसी साल अगस्त में कैलिफोर्निया की कोर्ट में ट्रायल के लिए जाएगा. यहां कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी जैसे राज्य मेटा के खिलाफ अपना केस पेश करेंगे. जुर्माने की रकम मेटा की कुल मार्केट वैल्यू लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर के करीब है, जो यह दिखाती है कि रेगुलेटर्स बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर हैं.
कैसे तय हुई इतनी बड़ी रकम?
रिपोर्ट के अनुसार मेटा ने कोर्ट में जो जानकारी दी, उसके अनुसार, इन चार राज्यों में प्रभावित हुए युवाओं और बच्चों की संख्या के आधार पर अपने यूजर्स प्रोटेक्शन एक्ट के तहत इस भारी-भरकम जुर्माने का आकलन किया है. दूसरी तरफ, मेटा ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि इस मांग का कोई कानूनी या तथ्यात्मक आधार नहीं है. कंपनी का कहना है, यूजर्स प्रोटेक्शन के इतिहास में इतने बड़े जुर्माने का कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता.
एआई भी है घेरे में
यह कानूनी लड़ाई अब सिर्फ मेटा तक सीमित नहीं रही है. टेक्नोलॉजी की दुनिया में डिजिटल एडिक्शन की चिंताएं अब एआई प्रोडक्ट्स की तरफ भी बढ़ने लगी हैं, क्योंकि एआई चैटबॉट्स अब इंसानों की तरह बातचीत करने और भावनात्मक रूप से जोड़ने में सक्षम हो रहे हैं. पिछले महीने ही फ्लोरिडा के अटॉर्नी जनरल जेम्स उथमेयर ने ओपन एआई और उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन के खिलाफ केस दर्ज कराया है. आरोप है कि कंपनी ने चैट जीपीटी को तेजी से फैलाने के चक्कर में सुरक्षा चिंताओं को इग्नोर किया और युवाओं में इसकी बढ़ती निर्भरता और गलत सलाहों के खतरों को ठीक से हैंडल नहीं किया. हालांकि, ओपन एआई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वे सुरक्षा उपायों में लगातार सुधार कर रहे हैं.
चैटबॉट्स से बढ़ रहा है इंसानों का लगाव
बता दें कि हाल ही में कई ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जहां लोग एआई चैटबॉट्स से रिश्ते में बंधते जा रहे हैं. इसी तरह का एक मामला 66 साल की महिला का भी सामने आया, जो बागवानी और टैक्स की मदद के लिए चैट जीटीपी का इस्तेमाल करते-करते उससे प्यार कर बैठी. वहीं, कई यूजर्स अकेलेपन और बीमारी के समय एआई को अपना सबसे बड़ा सहारा मान रहे हैं.
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