ICANN : भारत अब इंटरनेट के मामले में किसी दूसरे देश के भरोसे नहीं रहना चाहता! आज भारत की इंटरनेट की डोर दूसरे देशों के हाथों में है. लेकिन भारत अब इसमें बदलाव की तैयारी कर रहा है. इसी को लेकर मोदी सरकार ने इंटरनेट पर देश की संप्रभुता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैश्विक संस्था ICANN के सामने भारत में ही मेन रूट सर्वर बनाने की मांग उठा दी है. अमेरिका के रास्ते आने-जाने वाले नेटवर्क ट्रैफिक और साइबर सुरक्षा के खतरों पर भारत के कड़े रुख को देखते हुए ICANN जल्द ही भारत के पक्ष में एक बड़ा फैसला ले सकता है.
अपना रूट सर्वर होना जरूरी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव का कहना है कि इतनी बड़ी आबादी और इंटरनेट यूजर्स की सेफ्टी के लिए भारत के पास अपना रूट सर्वर होना जरूरी है. अगर भारत में ही मेन रूट सर्वर बनता है, तो भारत की डिजिटल संप्रभुता और इंटरनेट सुरक्षा को अभेद्य बनाया जा सकता है.
आखिर है क्या रूट सर्वर?
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर रूट सर्वर है क्या? तो इसका जवाब है कि जब आप इंटरनेट पर किसी वेबसाइट का नाम टाइप करते हैं, कंप्यूटर को यह पता लगाना होता है कि वह वेबसाइट किस सर्वर पर मौजूद है. इस काम में रूट सर्वर इंटरनेट की मेन डायरेक्टरी की तरह काम करते हैं. सरल शब्दों मं कहें तो, रूट सर्वर खुद वेबसाइट का पता नहीं बताते, बल्कि यह बताते हैं कि उस पते की जानकारी कहां मिलेगी. इसके बाद DNS सिस्टम के दूसरे सर्वर सही IP एड्रेस खोजकर आपको वेबसाइट तक ले जाते हैं.
ICANN के बीच बातचीत शुरू
अभी ICANN के पास अमेरिका, यूरोप, सिंगापुर, मिस्र और केन्या में ऐसे सर्वर हैं. अब भारत भी इस लिस्ट में शामिल होना चाहता है. इसके लिए भारत सरकार और ICANN के बीच बातचीत शुरू हो गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार भारत को सभी 13 मेन रूट सर्वर्स को मिरर करने वाले 18 सर्वर्स का एक पूरा क्लस्टर मिल सकता है. हालांकि, यह एक लंबी और मुश्किल प्रक्रिया है.
क्या होगा इससे फायदा?
भारत सरकार का अगर यह प्रयास सफल होता है, तो देश में इंटरनेट के मामले में दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. इससे यह फायदा होगा कि अगर कोई साइबर या मैलवेयर अटैक होता है, तो तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा. साथ ही इस तरह के खतरों को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइर्ड के गेटवे पर ही रोक लिया जा सकेगा.
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